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“क्या खतरनाक फिल्म है”, ‘धड़क 2’ की डायरेक्टर ने ‘धुरंधर’ पर उगला जहर

"What a dangerous film!" 'Dhadak 2' director spews venom at 'Dhurandhar'

नई दिल्ली: बॉलीवुड में अब एक और बड़ी बहस छिड़ गई है। ‘Dhurandhar’ (डूरंधर) नामक स्पाइ थ्रिलर फिल्म के बारे में ’Dhadak 2’ फ़िल्म की निर्देशक शाज़िया इक़बाल ने सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस फिल्म को “sinister” (दुष्ट/खतरनाक) बताया और आरोप लगाया कि यह फिल्म नफ़रत और हिंसा को बढ़ावा देती है।

क्या कहा शाज़िया इक़बाल ने?

शाज़िया इक़बाल ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ में बिना सीधे फिल्म का नाम लिए Dhurandhar की आलोचना की। उन्होंने लिखा:

“What a sinister film! It’s not hidden, it’s not unintentional — inciting hate and violence is in the DNA of the film.”
(“क्या खतरनाक फिल्म है! यह छिपा नहीं है, न ही अनजाना — नफ़रत और हिंसा इस फिल्म की पहचान में निहित है।”)

उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों की तुलना में समाज के अल्पसंख्यकों (minorities) के प्रति blatant apathy (खुली उदासीनता) दिखाई देती है।

उनका तर्क क्या है?

शाज़िया के अनुसार, Dhurandhar सिर्फ़ मनोरंजन नहीं है, बल्कि इसकी कहानी ऐसी संदेश देती है जो समाज में नफ़रत और विभाजन को बढ़ावा दे सकती है। उन्होंने इंडस्ट्री के उन लोगों की आलोचना की जो फिल्म की तकनीकी खूबियों की तारीफ़ करते हैं लेकिन उसके सामाजिक प्रभाव की ओर ध्यान नहीं देते।

‘Dhurandhar’ का हालिया सफ़र

Dhurandhar को निर्देशित किया है आदित्य धर ने, और इसमें मुख्य भूमिका निभाई है रणवीर सिंह ने। यह एक स्पाइ थ्रिलर है जिसमें एक भारतीय एजेंट आतंकवाद के खिलाफ मिशन पर जाता है। फिल्म पहले ही सिनेमाघरों में जबरदस्त सफलता हासिल कर चुकी है और इसके नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ के बाद भी बहुत लोकप्रियता मिली है।

मतभेद और प्रतिक्रिया

जहाँ कुछ कलाकार, जैसे अनुराग कश्यप और हृतिक रोशन, ने फिल्म की तकनीकी सफलता और अभिनय को सराहा है, वहीं शाज़िया जैसे फ़िल्ममेकर्स ने इसके कथानक और सामाजिक प्रभाव पर सवाल उठाए हैं। इससे फिल्म और उसके संदेश को लेकर मनोरंजन जगत में बहस तेज़ हो गई है।

बॉलीवुड की इस बड़ी फिल्म Dhurandhar पर अब सिर्फ़ समीक्षाएँ और बॉक्स ऑफिस ही नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक बहस भी चल रही है। शाज़िया इक़बाल की टिप्पणियों ने यह इंगित किया है कि फ़िल्मों के सामाजिक प्रभाव को लेकर इंडस्ट्री में मतभेद मौजूद हैं, और कलाकार सिर्फ़ कला ही नहीं, बल्कि उसके संदेश के बारे में भी सवाल उठा रहे हैं।

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