भारतीय फ़िल्म निर्माता SS Rajamouli ने हाल ही में भारत की सबसे एडवांस्ड मोशन कैप्चर (Motion Capture) तकनीक लॉन्च की है, जिसका उपयोग उनकी आने वाली फिल्म ‘वाराणसी’ के महत्वपूर्ण सीक्वेंस में किया जा रहा है। यह तकनीक उन ही प्रकार की है जो हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्मों ‘अवतार’ और ‘एवेंजर्स: एंडगेम’ में इस्तेमाल हुई थी।
A&M MoCap Lab – भारत की सबसे उन्नत MoCap सुविधा
राजामौली ने 25 फ़रवरी 2026 को हैदराबाद स्थित अन्नपूर्णा स्टूडियोज में A&M Motion Capture Lab की शुरुआत की है। यह सुविधा अककिनेनी नागार्जुन के अन्नपूर्णा स्टूडियोज और मिहिरा विज़ुअल लैब्स के सहयोग से स्थापित की गई है, जिसमें हॉलीवुड-आधारित Animatrik Film Design भी तकनीकी भागीदार है।
मोशन कैप्चर टेक्नोलॉजी कैमरों और सेंसर के माध्यम से इंसान की आवाज़, हाव-भाव और मूवमेंट को रिकॉर्ड करती है और उसे 3D डिजिटल कैरेक्टर में कन्वर्ट करती है। इसी तकनीक का उपयोग ‘अवतार’ एवं ‘लॉर्ड ऑफ़ द रिंग’ जैसे फिल्मों में भी हुआ था।
‘वाराणसी’ में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
राजामौली ने बताया कि ‘वाराणसी’ के कुछ बेहद अहम सीक्वेंस A&M MoCap Lab में शूट किए गए हैं। सोशल मीडिया पर जो वीडियो सामने आया है, उससे लगता है कि यह सीक्वेंस लंका युद्ध-स्टाइल एएक्शन सीन से जुड़ा हुआ हो सकता है, जिसमें स्टंट आर्टिस्ट्स गदा-भाले के साथ अभिनय करते दिख रहे हैं।
फिल्म में इस तकनीक के इस्तेमाल से वानरों, राक्षसों और अन्य डिजिटल किरदारों को ज़्यादा रियलिस्टिक और इमोशनल एक्सप्रेशन के साथ दिखाया जा सकेगा — कुछ ऐसा ही प्रभाव ‘अवतार’ और ‘एवेंजर्स’ में देखा गया था।
क्यों है यह टेक्नोलॉजी बड़ा कदम?
मोशन कैप्चर स्टूडियो भारत में होने का मतलब है कि अब फिल्म निर्माता हॉलीवुड-मात्रा की तकनीक पर विदेश नहीं निर्भर रहेंगे। राजामौली ने अपने पुराने अनुभवों का ज़िक्र करते हुए कहा कि अगर उनके पुराने प्रोजेक्ट्स में जैसे ‘बाहुबली’ और ‘ईगा’ में यह तकनीक पहले उपलब्ध होती, तो वे उन्हें और भी बेहतर बना सकते थे।
नागार्जुन ने भी कहा है कि यह सुविधा भारतीय फिल्मों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगी, जिससे फ़िल्म निर्माता बड़े पैमाने पर शोधपूर्ण, इमोशनल और तकनीकी रूप से मजबूत प्रोजेक्ट दे सकेंगे।
MoCap तकनीक कैसे काम करती है?
मोशन कैप्चर में एक व्यक्ति पर विशेष मार्कर या सेंसर लगाए जाते हैं। उसके बाद कई कैमरों द्वारा हर दृष्टिकोण से उसकी हर हलचल को रिकॉर्ड किया जाता है। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इन सेंसर डेटा को कैरेक्टर एनीमेशन में बदल देता है, जिससे डिजिटल किरदार असली इंसानों की तरह हाव-भाव और मूवमेंट दिखा पाते हैं।
यह तकनीक हॉलीवुड में पहले से प्रचलित है और इसे ‘अवतार’, ‘स्पाइडर-मैन: नो वे होम’ और ‘एवेंजर्स: एंडगेम’ जैसी फिल्मों में अत्यधिक सफलता से इस्तेमाल किया गया है।
भारतीय सिनेमा का तकनीकी विकास
मोशन कैप्चर लैब की शुरुआत अन्नपूर्णा स्टूडियोज के 50 साल की विरासत के मौके पर हुई है, जिसे इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा तकनीकी प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
फिल्म ‘वाराणसी’ में मुख्य कलाकारों में महेश बाबू और प्रियंका चोपड़ा जोन्स हैं, और यह फिल्म 7 अप्रैल 2027 को रिलीज़ होने वाली है।
इस तकनीक के आने से भारतीय फिल्मों में बेहतर VFX, इमोशनल डिजिटल किरदार और ग्लोबल-लेवल स्टोरीटेलिंग संभव होगी, जो आगे चलकर इंडस्ट्री की क्षमता को और बढ़ाएगी।
एस. एस. राजामौली की पहल सिर्फ एक तकनीकी अनावरण नहीं, बल्कि यह भारतीय फिल्म उद्योग को डिजिटल और ग्लोबल स्तर पर एक नई पहचान देने जैसा कदम है। MoCap तकनीक की वजह से भारत में अब बड़ी, क्रिएटिव और प्रभावशाली फ़िल्में बनाना और आसान हो जाएगा।
यह भी पढ़ें – Akshay Kumar की ‘Bhooth Bangla’ का पहला गाना रिलीज — ‘Ram Ji Aake Bhala Karenge’ ने मचाया धमाल


























