बॉलीवुड अभिनेता और सांसद रवि किशन ने हाल ही में भारतीय सिनेमा पर अपना दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘भाभीजी घर पर हैं! फन ऑन द रन’ के प्रचार के दौरान यह बात कही कि छोटे बजट वाली फिल्मों की क्षमता भी बड़ी फिल्मों की तरह दुनिया भर में पहचान बना सकती है।
लापता लेडीज़’ और बड़े बजट की फ़िल्मों की तुलना
‘लापता लेडीज़’ जैसी फिल्में, जिनका बजट लगभग ₹5 करोड़ था, ने साबित किया है कि कहानी और कंटेंट बड़ा फर्क डालते हैं। रवि किशन ने कहा कि जब धुरंधर और बॉर्डर 2 जैसी बड़े बजट फिल्मों के बीच यह फिल्म ऑस्कर की दिशा में बढ़ी, तो यह साबित हुआ कि छोटे प्रोजेक्ट भी अपनी पहचान बना सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ‘लापता लेडीज़’ ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों से अच्छा रेस्पॉन्स पाया और इस तरह की फिल्में इंडस्ट्री में नई उम्मीद जगाती हैं। रवि किशन ने यह भी कहा कि अगर उनकी फिल्म भाभीजी घर पर हैं! भी रिलीज के बाद अच्छा प्रदर्शन करती है, तो यह इतिहास का एक महत्वपूर्ण पल होगा।
रवि किशन की बात: कंटेंट मायने रखता है
रवि किशन ने यह भी कहा कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कंटेंट-ड्रिवन फिल्में ही आगे बढ़ा सकती हैं। उनका मानना है कि जहां एक तरफ बड़े बजट और बड़े सितारों वाली फिल्में होती हैं, वहीं कम बजट और अच्छी कहानी वाली फिल्में भी दर्शकों को जोड़ सकती हैं।
उन्होंने उदाहरण के तौर पर ‘लापता लेडीज़’ का ज़िक्र किया, जो छोटे बजट में बनी थी और भारत की ओर से ऑस्कर एंट्री के लिए चुनी गई थी।
लापता लेडीज़’ की खास बातें
- लापता लेडीज़ 2023 में रिलीज़ हुई एक हिंदी-भाषा की कॉमेडी-ड्रामा फ़िल्म है जिसे किरण राव ने निर्देशित किया है।
- फिल्म कहानी, स्क्रिप्ट और कलाकारों की एक्टिंग के लिए काफी सराही गई थी।
- इसे भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर ऑस्कर 2025 के लिए भेजा गया, हालांकि यह नॉमिनेट नहीं हुई।
रवि किशन का यह बयान भारतीय सिनेमा में एक अहम बदलाव की ओर इशारा करता है — जहाँ अब कहानी-केंद्रित, छोटे बजट की फ़िल्में भी बड़े बजट की फिल्मों के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में यह साफ़ है कि कंटेंट ही अब दर्शकों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सबसे बड़ा हथियार बन रहा है।
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