बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता Rajpal Yadav मुश्किलों में फंस गए हैं क्योंकि चेक बाउंस के एक गंभीर मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनकी मोहलत बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने उन्हें 4 फरवरी 2026 तक पुलिस के सामने सरेंडर (आत्मसमर्पण) करने का आदेश दिया है।
काफी समय से चल रहा मामला
राजपाल यादव पर एक कंपनी के साथ ₹5 करोड़ की वसूली का विवाद है। शिकायतकर्ता के अनुसार यादव की कंपनी को 2010 में एक फिल्म प्रोजेक्ट के लिए पैसा दिया गया था, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद कई चेक भी बैंक में बाउंस हो गए, जिससे मामला नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (धारा 138) के अंतर्गत आपराधिक स्तर पर चला गया।
निचली अदालत ने इस मामले में यादव और उनकी पत्नी को 6 महीने की सज़ा सुनाई थी, हालांकि उच्च न्यायालय ने पहले इस सज़ा को अस्थायी रूप से रोका था ताकि समझौता और भुगतान किया जा सके।
मोहलत बढ़ाने की याचिका खारिज
राजपाल यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में राहत पाने के लिए याचिका दायर की थी और एक हफ्ते की मोहलत की मांग की थी ताकि वह कुछ धनराशि का इंतज़ाम कर सकें। उनके वकील ने बताया कि यादव के पास ₹50 लाख का इंतज़ाम भी है। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि यादव ने पहले भी कई बार कोर्ट के भरोसे को तोड़ा है, इसलिए अब और नरमी नहीं दिखाई जाएगी।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने स्पष्ट किया कि पहले से ही उन्हें दो दिनों की मोहलत दी जा चुकी थी, और अब 4 फरवरी शाम 4 बजे तक उन्हें सरेंडर करना ही होगा।
कानूनी प्रक्रिया और आलोचना
कोर्ट ने अभिनेता के व्यवहार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनका स.previous आदेशों का पालन न करना न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गंभीर लापरवाही दिखाता है। अदालत ने बार-बार दिए गए आश्वासनों को तोड़ने के लिए राजपाल यादव की आलोचना भी की है।
यदि वे सरेंडर नहीं करते हैं, तो अदालत के आदेश के अनुसार उन्हें जेल ले जाया जा सकता है और पहले की सजा पूरी करनी पड़ेगी।
क्या है आगे?
यह मामला बॉलीवुड में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि राजपाल यादव एक प्रतिष्ठित कॉमेडियन और अभिनेता हैं जिन्होंने कई फिल्मों में काम किया है। अब देखना यह है कि सरेंडर के बाद उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या वे भुगतान विवाद को समझौते से निपटा पाते हैं।
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