UGC reservation rules 2026: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के आरक्षण नियमों को लेकर समय-समय पर सवाल और विवाद उठते रहे हैं. हाल ही में UGC के नए दिशानिर्देशों के बाद एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी में किस वर्ग को कितना आरक्षण मिलता है और इसे कैसे लागू किया जाता है.
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कॉलेज-यूनिवर्सिटी में आरक्षण का तय प्रतिशत
UGC और केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों और UGC से संबद्ध कॉलेजों में आरक्षण इस प्रकार है.
अनुसूचित जाति (SC): 15%
अनुसूचित जनजाति (ST): 7.5%
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC – Non Creamy Layer): 27%
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 10% इनके अलावा दिव्यांगजनों (PwD) के लिए भी निर्धारित प्रावधान लागू होते हैं.
UGC के नए नियमों में क्या बदला?
UGC के ताजा दिशानिर्देशों में सबसे अहम बात “यूनिट-आधारित रोस्टर सिस्टम” को लेकर स्पष्टता है, इसके तहतहर विभाग (Department) या यूनिट को एक अलग इकाई माना जाएगा,उसी यूनिट के भीतर आरक्षण रोस्टर लागू होगा, भर्ती या एडमिशन उसी यूनिट के रोस्टर के आधार पर किया जाएगा. UGC का कहना है कि इससे आरक्षण का संतुलित और पारदर्शी तरीके से पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा.
एडमिशन और भर्ती—दोनों पर लागू
UGC के नियम न सिर्फ छात्रों के एडमिशन, बल्कि शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती पर भी लागू होते हैं, सभी संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होता है कि आरक्षण नीति का उल्लंघन न हो.
विवाद की वजह क्या है?
कुछ शिक्षाविदों और संगठनों का कहना है कि यूनिट-आधारित रोस्टर से कुछ विभागों में आरक्षित पद या सीटें कम हो सकती हैं. वहीं, UGC का तर्क है कि यह व्यवस्था संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार लागू की गई है.
छात्रों के लिए क्या जरूरी है?
UGC ने छात्रों को सलाह दी है कि वे एडमिशन से पहले संस्थान की आरक्षण नीति ध्यान से पढ़ें, अपनी कैटेगरी और प्रमाणपत्रों को समय पर अपडेट रखें, किसी भी भ्रम की स्थिति में संबंधित यूनिवर्सिटी या UGC की आधिकारिक सूचना देखें.
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