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MadanMohanMalviyaBirthAnnversary: जानें उनके अद्भुत विचार और प्रेरक भाषण

Pandit Madan Mohan Malviya Jayanti

Malviya Jayanti: मदन मोहन मालवीय की जयंती आज यानी 25 दिसंबर को मनाई जाती है, और 2025 में उनकी 164वीं जयंती मनाई जा रही है. मदन मोहन मालवीय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, शिक्षा सुधारक, समाजसेवी और राष्ट्रवादी नेता थे. उन्हें ‘महामना’ के नाम से भी जाना जाता है. उनका योगदान भारतीय राजनीति, समाज सुधार और शिक्षा क्षेत्र में अनमोल रहा है, उनकी जयंती 25 दिसंबर को मनाई जाती है. यह दिन उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने और उनके योगदान को याद करने का अवसर है.

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शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार
पं. मदन मोहन मालवीय का मानना था कि शिक्षा ही किसी राष्ट्र की आत्मा होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की स्थापना की, उनका उद्देश्य था ऐसी शिक्षा व्यवस्था तैयार करना, जो आधुनिक विज्ञान के साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों को भी संजोए. आज BHU उनके इसी विज़न का जीवंत उदाहरण है.

अद्भुत विचार, जो आज भी प्रासंगिक
महामना के विचार समय से बहुत आगे थे. वे कहते थे कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार पाना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी भी है, उन्होंने स्त्री शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता पर विशेष बल दिया. उनके विचार आज भी युवाओं को नैतिक और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं.

प्रेरक भाषणों की शक्ति
पं. मदन मोहन मालवीय अपने ओजस्वी और विचारोत्तेजक भाषणों के लिए प्रसिद्ध थे, उनके भाषणों में देशभक्ति, आत्मसम्मान और सामाजिक सुधार का स्पष्ट संदेश होता था. वे सरल शब्दों में गहन विचार रखते थे, जिससे आम जनता से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग तक प्रभावित होता था.

स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका
महामना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सक्रिय नेता थे, उन्होंने असहयोग आंदोलन, स्वदेशी आंदोलन और सामाजिक सुधारों में भाग लिया. उनके भाषणों और लेखों ने देशवासियों में स्वतंत्रता और आत्मगौरव की भावना को प्रबल किया.

जयंती पर प्रेरणा लेने का समय
आज पं. मदन मोहन मालवीय की जयंती पर उनके विचार और भाषण हमें यह याद दिलाते हैं कि शिक्षा, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति से ही सशक्त भारत का निर्माण संभव है, उनका जीवन आज भी युवाओं, शिक्षकों और समाज के लिए प्रेरणास्रोत है.

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