KnowledgeIsTips: भारत की प्रमुख नदियों में से एक कृष्णा नदी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यह केवल जल स्रोत नहीं है कृष्णा नदी को खासकर “भारत की हीरा नदी” के नाम से भी जाना जाता है.
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कृष्णा नदी का परिचय
यह भारत की तीसरी सबसे लंबी प्रायद्वीपीय नदी है, यह महत्वपूर्ण कृषि, जलाशयों और ऊर्जा उत्पादन में अहम भूमिका निभाती है. नदी महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होकर बहती है, और अंततः बंगाल की खाड़ी में मिलती है.
हीरा नदी क्यों कहा जाता है?
कृष्णा नदी को “हीरा नदी” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके तटों और आसपास के क्षेत्रों में हीरे और कीमती खनिजों की खोज हुई है. ऐतिहासिक रूप से नदी के किनारे कीमती पत्थर और खनिजों का व्यापार भी हुआ करता था. इसके अलावा, नदी के पानी की शुद्धता और प्राकृतिक सुंदरता ने इसे भारत की खजानों में एक विशेष स्थान दिलाया.
कृष्णा नदी और कृषि
कृष्णा नदी के जलस्रोत से सटी भूमि उर्वरक और फसल उगाने के लिए उपयुक्त मानी जाती है, यह नदी महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों के लिए जीवनदायिनी है. यहाँ से सिंचाई के लिए कई बड़े जलाशय और बांध बनाए गए हैं, जिनसे लाखों लोग लाभान्वित होते हैं.
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
कृष्णा नदी भारतीय संस्कृति में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. इसके तट पर कई प्रसिद्ध मंदिर, तीर्थ स्थल और धार्मिक उत्सव आयोजित होते हैं. यहाँ नदी को पवित्र और समृद्धि देने वाला स्रोत माना जाता है, और लोग यहाँ स्नान और पूजा के लिए आते हैं.
पर्यावरण और संरक्षण
हालांकि कृष्णा नदी की महत्ता विशाल है, इसे प्रदूषण और अतिक्रमण से खतरा भी है, नदी के किनारे बसे कई जिलों में आज भी इसे स्वच्छ और संरक्षित रखने के प्रयास किए जा रहे हैं. पर्यावरण विशेषज्ञ इसे प्राकृतिक और आर्थिक खजाने के रूप में मानते हैं.
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