Holi2026: रंगों के त्योहार होली पर भांग पीने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर यह चलन शुरू कैसे हुआ? इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं, सांस्कृतिक परंपराएं और ऐतिहासिक संदर्भ जुड़े हुए हैं.
Holi2026: होली में रंग खेलने की परंपरा कैसे शुरू हुई? जानिए
भगवान शिव से जुड़ी मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भांग को भगवान शिव का प्रिय पेय माना जाता है, मान्यता है कि शिव जी तपस्या के दौरान भांग का सेवन करते थे. होली का पर्व फाल्गुन मास में आता है, जो शिव भक्ति और उत्सव से भी जुड़ा माना जाता है, इसी कारण कई स्थानों पर होली के अवसर पर भांग का सेवन परंपरा का हिस्सा बन गया.
प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख
भांग (कैनाबिस) का उल्लेख आयुर्वेद और कुछ प्राचीन ग्रंथों में औषधीय रूप में मिलता है, इसे सीमित मात्रा में औषधि के रूप में उपयोग किया जाता था. धीरे-धीरे यह सामाजिक और उत्सव परंपराओं से भी जुड़ गया.
उत्सव और मस्ती का प्रतीक
होली को उल्लास और मस्ती का त्योहार माना जाता है, उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भांग से बनी ठंडाई या पकवानों का सेवन परंपरागत रूप से किया जाता है. वाराणसी और मथुरा जैसे शहरों में यह चलन विशेष रूप से प्रसिद्ध है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों के अनुसार, भांग का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, इससे चक्कर, उल्टी, घबराहट, लो ब्लड प्रेशर और मानसिक असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए त्योहार का आनंद लेते समय संयम और सावधानी बेहद जरूरी है.
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