SarojiniNaiduBirthAnniversary: भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई महान नेताओं ने अपना अमूल्य योगदान दिया, लेकिन उनमें से एक नाम ऐसा है जिसे पूरी दुनिया ‘भारत कोकिला’ के नाम से जानती है. हम बात कर रहे हैं सरोजिनी नायडू की, जिनका जन्म 13 फरवरी 1879 को हुआ था. वे न सिर्फ एक महान कवयित्री थीं, बल्कि एक साहसी स्वतंत्रता सेनानी और प्रभावशाली नेता भी थीं.
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बचपन से ही थीं प्रतिभाशाली
सरोजिनी नायडू का जन्म हैदराबाद के एक शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था, उनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक और शिक्षक थे, जबकि उनकी माता वरदा सुंदरी एक कवयित्री थीं. सरोजिनी नायडू ने बहुत कम उम्र में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था और उनकी प्रतिभा को देखकर लोग हैरान रह जाते थे.
क्यों कहा जाता है ‘भारत कोकिला’?
सरोजिनी नायडू की कविताओं में देशभक्ति, प्रकृति और भावनाओं का अद्भुत मिश्रण होता था, उनकी मधुर आवाज और प्रभावशाली भाषण शैली के कारण उन्हें ‘भारत कोकिला’ यानी ‘Nightingale of India’ कहा जाने लगा. उनकी कविताएं लोगों को प्रेरित करती थीं और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति जागरूक करती थीं.
स्वतंत्रता संग्राम में निभाई अहम भूमिका
सरोजिनी नायडू ने महात्मा गांधी के साथ मिलकर कई आंदोलनों में भाग लिया, उन्होंने देश की आजादी के लिए कई रैलियों और आंदोलनों का नेतृत्व किया और ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाई। उनके साहस और नेतृत्व ने महिलाओं को भी स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया.
बनीं भारत की पहली महिला राज्यपाल
आजादी के बाद सरोजिनी नायडू को एक और ऐतिहासिक जिम्मेदारी मिली, वे उत्तर प्रदेश की राज्यपाल बनीं और इस पद पर पहुंचने वाली भारत की पहली महिला बनीं। यह उनके नेतृत्व और योगदान का प्रमाण था.
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
सरोजिनी नायडू ने अपने जीवन से यह साबित किया कि महिलाएं भी हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं, उन्होंने समाज में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनीं.
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