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AtalBihariVajpayeeJayanti: न्यूक्लियर टेस्टिंग ‘अटल बिहारी वाजपेयी’ का ऐतिहासिक फैसला

Atal Bihari Vajpayee nuclear test: आज यानी 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती है. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर देश उनके उन फैसलों को याद करता है, जिन्होंने भारत की दिशा और दशा बदल दी, इन्हीं में सबसे ऐतिहासिक और साहसिक फैसला था 1998 में पोखरण में किया गया परमाणु परीक्षण (न्यूक्लियर टेस्टिंग), जिसने भारत को विश्व की परमाणु शक्तियों की सूची में मजबूती से खड़ा कर दिया.

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पोखरण-II: भारत की ताकत का ऐलान
11 और 13 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में भारत ने सफलतापूर्वक पांच परमाणु परीक्षण किए, इस ऑपरेशन को “पोखरण-II” नाम दिया गया, उस समय अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे और यह निर्णय उनकी राजनीतिक इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

दुनिया के दबाव के बावजूद लिया गया फैसला
परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका समेत कई देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पर दबाव बनाया गया, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, उनका यह रुख बताता है कि वह राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते थे.

भारत बना परमाणु शक्ति
पोखरण न्यूक्लियर टेस्टिंग के बाद भारत आधिकारिक रूप से परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बन गया। इससे न केवल देश की सैन्य ताकत बढ़ी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की साख और प्रभाव भी मजबूत हुआ, यह फैसला आने वाले वर्षों में भारत की रक्षा नीति की नींव बना.

शांति का संदेश भी दिया
अटल बिहारी वाजपेयी केवल शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहे, परमाणु परीक्षण के बाद उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत परमाणु हथियारों का इस्तेमाल केवल आत्मरक्षा के लिए करेगा और “नो फर्स्ट यूज़” की नीति अपनाएगा, यह उनके शांतिवादी और संतुलित नेतृत्व को दर्शाता है.

अटल जयंती पर ऐतिहासिक निर्णय की याद
अटल बिहारी वाजपेयी जयंती के अवसर पर उनका यह ऐतिहासिक फैसला आज भी देशवासियों को गर्व से भर देता है. पोखरण न्यूक्लियर टेस्टिंग सिर्फ एक सैन्य कदम नहीं था, बल्कि यह भारत के आत्मविश्वास, साहस और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया.

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