PeepalTreeWorship: हिंदू धर्म में पेड़-पौधों को केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन का आधार और ईश्वरीय स्वरूप माना गया है. इन्हीं में से एक है पीपल का पेड़, जिसकी पूजा सदियों से की जाती आ रही है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर पीपल को इतना पवित्र क्यों माना गया? इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं.
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शास्त्रों में पीपल का महत्व
हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पीपल के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना गया है. ब्रह्मा – जड़ में, विष्णु – तने में, महेश (शिव) – शाखाओं और पत्तों में वहीं भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं “वृक्षों में मैं पीपल हूं”, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है.
पितृ दोष और पीपल का संबंध
धार्मिक मान्यता है कि पीपल के पेड़ में पितरों का वास होता है. इसी कारण अमावस्या, शनिवार और सोमवती अमावस्या को पीपल की पूजा, जल अर्पण और दीपदान किया जाता है. माना जाता है कि इससे पितृ दोष शांत होता है और परिवार में सुख-शांति आती है.
शनिवार को पीपल की पूजा क्यों?
शनिवार का संबंध शनि देव से माना जाता है, मान्यता है कि पीपल की पूजा करने से शनि दोष कम होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. इसलिए कई लोग शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं.
वैज्ञानिक कारण भी हैं खास
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ पीपल का वैज्ञानिक महत्व भी बेहद खास है. पीपल एकमात्र ऐसा वृक्ष माना जाता है जो दिन-रात ऑक्सीजन छोड़ता है, इसकी पत्तियां वातावरण को शुद्ध करती हैं, पीपल के आसपास बैठने से मानसिक शांति मिलती है, इसी वजह से पुराने समय में ऋषि-मुनि पीपल के नीचे ध्यान और तपस्या किया करते थे.
पीपल काटना पाप क्यों माना गया?
पीपल को काटना पाप इसलिए माना गया ताकि लोग इसे नुकसान न पहुंचाएं और पर्यावरण संतुलन बना रहे, यह एक तरह से प्रकृति संरक्षण का संदेश भी था, जिसे धर्म से जोड़कर समाज में स्थापित किया गया.
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