BarsanaHoli2026: ब्रज की धरती पर मनाया जाने वाला अनोखा उत्सव लट्ठमार होली हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है, खासतौर पर बरसाना और नंदगांव में खेली जाने वाली यह होली अपनी अनूठी परंपरा और धार्मिक आस्था के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध है.
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राधा-कृष्ण की लीला से जुड़ी परंपरा
मान्यता है कि यह परंपरा भगवान कृष्ण और राधा की प्रेम-लीलाओं से जुड़ी है. कथा के अनुसार, कृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाना जाकर राधा और उनकी सखियों को छेड़ते थे. जवाब में बरसाना की महिलाएं उन्हें लाठियों से मजाक-मस्ती में भगाती थीं, उसी याद में आज भी महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से लाठियों से पुरुषों को मारती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं.
अनूठी रस्में और उत्सव
लट्ठमार होली सिर्फ लाठियों का खेल नहीं, बल्कि पूरे ब्रज क्षेत्र की संस्कृति का प्रतीक है. मंदिरों में भजन-कीर्तन और फूलों की होली, रंग-गुलाल और पारंपरिक नृत्य, ब्रज के खास पकवान और लोकगीत, यह सब मिलकर त्योहार को बेहद खास बना देते हैं.
देश-विदेश से आते हैं पर्यटक
हर साल हजारों विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु इस अनोखी होली को देखने आते हैं. प्रशासन विशेष सुरक्षा और व्यवस्था करता है, और पर्यटन विभाग भी इसे बढ़ावा देता है, यह उत्सव उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक पर्यटन का बड़ा आकर्षण बन चुका है.
क्यों मशहूर है बरसाना की लट्ठमार होली?
राधा-कृष्ण की पौराणिक कथा से जुड़ी परंपरा महिलाओं द्वारा लाठियों से खेली जाने वाली अनोखी होली, ब्रज संस्कृति और लोक परंपराओं का अद्भुत संगम, देश-विदेश में प्रसिद्ध धार्मिक उत्सव है.
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