TuesdaySpecial: हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है, उन्हें अनेक नामों से पुकारा जाता है, लेकिन सबसे प्रसिद्ध नामों में से एक है संकटमोचन हर मंगलवार और शनिवार को भक्त “संकटमोचन हनुमान” का स्मरण करते हैं. चलिए जानते है कि हनुमान जी को संकटमोचन क्यों कहा जाता है? इसके पीछे गहरी पौराणिक कथाएं और धार्मिक विश्वास जुड़े हुए हैं.
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संकटमोचन का अर्थ
‘संकट’ का अर्थ है—कष्ट, परेशानी या बाधा और ‘मोचन’ का अर्थ है—मुक्ति, यानी जो अपने भक्तों को हर प्रकार के संकट से मुक्त करें, वही संकटमोचन कहलाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी अपने सच्चे भक्तों के जीवन से भय, दुख और बाधाओं को दूर करते हैं.
रामायण से जुड़ी कथा
रामायण में हनुमान जी को संकटमोचन कहे जाने का सबसे बड़ा कारण उनके द्वारा किए गए अद्भुत कार्य हैं, जब माता सीता लंका में रावण की कैद में थीं, तब हनुमान जी ने समुद्र लांघकर लंका पहुंचने का असंभव कार्य किया. यही नहीं, लक्ष्मण के मूर्छित होने पर संजीवनी बूटी लाकर उन्होंने उनका जीवन बचाया, इन घटनाओं ने उन्हें संकटों से उबारने वाला देवता सिद्ध किया.
भक्तों के कष्ट हरने की मान्यता
धार्मिक विश्वास है कि जो भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा करता है, उसके जीवन में आने वाले संकट स्वतः दूर हो जाते हैं. हनुमान चालीसा में भी कहा गया है “नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा.” अर्थात हनुमान जी का निरंतर स्मरण करने से रोग, भय और पीड़ा समाप्त हो जाती है.
भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
लोक मान्यताओं में हनुमान जी को भूत-प्रेत, नकारात्मक शक्तियों और अनिष्ट से रक्षा करने वाला देवता माना जाता है, यही कारण है कि घरों और मंदिरों में उनकी प्रतिमा स्थापित की जाती है, ताकि संकट पास न आए.
मंगलवार और शनिवार का महत्व
मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है, मान्यता है कि इन दिनों की गई आराधना से आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है. कई भक्त व्रत रखकर संकटमोचन हनुमान की कृपा प्राप्त करते हैं.


























