Shiv Puja Vidhi: हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है. शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भस्म चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जहां लगभग हर पूजा में नारियल चढ़ाया जाता है, वहीं शिवलिंग पर नारियल क्यों नहीं चढ़ाया जाता? इसके पीछे धार्मिक, शास्त्रीय और प्रतीकात्मक कारण बताए गए हैं.
शास्त्रों में क्या कहा गया है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग को निराकार शिव का प्रतीक माना जाता है, यह सृजन और ऊर्जा का स्रोत है. नारियल को शास्त्रों में फल और बीज का रूप माना गया है. शिवलिंग पर फल अर्पित करना शास्त्रीय दृष्टि से उचित नहीं माना जाता, क्योंकि शिवलिंग स्वयं सृष्टि के मूल तत्व का प्रतीक है.
नारियल का कठोर स्वरूप
नारियल बाहर से कठोर और अंदर से खोखला होता है, मान्यता है कि शिवलिंग पर ऐसी कठोर वस्तु चढ़ाने से पूजा की कोमल और सात्त्विक भावना भंग होती है. शिव पूजा में सरल, तरल और पवित्र पदार्थों को प्राथमिकता दी जाती है.
जल अभिषेक में बाधा
शिवलिंग की पूजा में जलधारा का विशेष महत्व है, नारियल चढ़ाने से शिवलिंग का मुख ढक जाता है, जिससे जल का प्रवाह बाधित होता है, इसी कारण नारियल को शिवलिंग पर अर्पित करना उचित नहीं माना जाता.
नारियल किसे चढ़ाया जाता है?
नारियल को सामान्यत भगवान गणेश, देवी-देवताओं और कलश स्थापना में चढ़ाया जाता है. शिव पूजा में इसकी बजाय बेलपत्र, जल, दूध, दही, शहद, भांग और धतूरा अर्पित करना अधिक फलदायी माना गया है.
लोक मान्यता और सावधानी
कुछ स्थानों पर अज्ञानवश शिवलिंग पर नारियल रख दिया जाता है, लेकिन पंडितों और शास्त्रों के अनुसार यह पूजा विधि की त्रुटि मानी जाती है. श्रद्धा के साथ सही विधि अपनाना ही सबसे बड़ा पुण्य है.
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