Advertisement

Kapoor: पूजा में कपूर क्यों जरूरी है? जानिए

camphor important in puja

Why do we burn camphor: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान कपूर जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है. चाहे घर की दैनिक आरती हो, मंदिर की पूजा या कोई विशेष धार्मिक अनुष्ठान कपूर के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा में कपूर को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है? इसके पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं.

Vrindavan: योगी और नितिन नवीन ने बांकेबिहारी की चौखट पर टेका मत्था, बोले- यूपी अब पहचान के संकट से मुक्त

धार्मिक मान्यताएं: आत्मसमर्पण का प्रतीक
धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार कपूर जब जलता है तो बिना कोई अवशेष छोड़े पूरी तरह समाप्त हो जाता है, इसे अहंकार के त्याग और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है. आरती के समय कपूर जलाकर भगवान के सामने घुमाना यह संदेश देता है कि भक्त अपना तन-मन-धन ईश्वर को समर्पित कर रहा है.

पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत
कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध करती है, मान्यता है कि कपूर जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इसी कारण पूजा के अंत में कपूर की आरती की जाती है, ताकि पूरा वातावरण सात्त्विक और शांत हो सके.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: वायु शुद्धिकरण में सहायक
वैज्ञानिक दृष्टि से कपूर में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं। कपूर के जलने से निकलने वाला धुआं हवा में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को कम करने में मदद करता है, यही कारण है कि पुराने समय में भी धार्मिक स्थलों और घरों में कपूर का प्रयोग व्यापक रूप से किया जाता था.

मानसिक शांति और एकाग्रता
कपूर की खुशबू सीधे मस्तिष्क पर असर डालती है। यह तनाव कम करने, मन को शांत रखने और ध्यान में एकाग्रता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है. पूजा के दौरान कपूर जलाने से भक्त का मन भटकता नहीं और वह ध्यानपूर्वक ईश्वर का स्मरण कर पाता है.

वास्तु और ज्योतिष में कपूर का महत्व
वास्तु शास्त्र के अनुसार कपूर जलाने से घर के वास्तु दोष कम होते हैं, कई लोग रोज सुबह-शाम घर के मंदिर या मुख्य द्वार पर कपूर जलाते हैं, ताकि घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे.

परंपरा और संस्कृति से जुड़ाव
कपूर का उपयोग केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा है, पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े रखती है.

इसे भी पढ़े-SuryaArghya: सुबह-सुबह सूर्य को जल क्यों दिया जाता है? जानिए कारण