ShivPujaVidhi: भगवान शिव की पूजा केवल मंत्र और अभिषेक तक सीमित नहीं मानी जाती, बल्कि पूजा के बाद किए जाने वाले कुछ छोटे-छोटे कर्म भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं. शास्त्रों और लोक-मान्यताओं के अनुसार शिव पूजा के बाद 3 विशेष स्पर्श करना शुभ फलदायी माना जाता है, माना जाता है कि इससे पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, आइए जानते हैं इन तीन स्पर्शों का महत्व.
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शिव पूजा के बाद ये 3 स्पर्श क्यों जरूरी
पृथ्वी (धरती) का स्पर्श
शिव पूजा के बाद सबसे पहले पृथ्वी को स्पर्श करने की परंपरा है, यह धरती माता के प्रति कृतज्ञता और विनम्रता का प्रतीक है, मान्यता है कि इससे पूजा के दौरान उत्पन्न अतिरिक्त ऊर्जा संतुलित होती है और व्यक्ति अहंकार से मुक्त रहता है.
दोनों कानों का स्पर्श
पूजा के बाद दोनों कानों को छूना आत्मशुद्धि का संकेत माना जाता है, शास्त्रों में कहा गया है कि कानों में स्थित नसें और बिंदु मन और इंद्रियों को नियंत्रित करते हैं. यह स्पर्श गलतियों के लिए क्षमा-याचना और आत्मसंयम का भाव प्रकट करता है.
आंखों का स्पर्श (या मस्तक पर हाथ रखना)
तीसरा महत्वपूर्ण स्पर्श आंखों या मस्तक का होता है, इसका अर्थ है पूजा से प्राप्त दिव्य ऊर्जा को दृष्टि और विचारों में धारण करना. माना जाता है कि इससे सकारात्मक सोच, शांति और स्पष्टता आती है.
क्या हर मंदिर में यह नियम समान है?
भारत के अलग-अलग क्षेत्रों और संप्रदायों में पूजा की विधि थोड़ी अलग हो सकती है, कहीं आंखों की जगह हृदय का स्पर्श भी किया जाता है, लेकिन भाव वहीं रहता है पूजा का पूर्ण समापन और आत्मसंतुलन.
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