Rangbhari Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में रंगभरी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी जिसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं. यह पर्व महाशिवरात्रि के बाद और होली से पहले आता है, मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के बाद पहली बार काशी में रंग खेला गया था, इसी वजह से वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में इस दिन भव्य उत्सव और गुलाल की परंपरा होती है.
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रंगभरी एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और परिवार में प्रेम बढ़ता है, इसे होली की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है.
रंगभरी एकादशी पर क्या करें
भगवान शिव-पार्वती की पूजा- सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और फूल चढ़ाकर पूजा करें.
व्रत या उपवास- इस दिन एकादशी व्रत रखने से मन की इच्छाएं पूरी होने की मान्यता है.
गुलाल अर्पित करें- भगवान शिव और माता पार्वती को गुलाल अर्पित कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.
दान-पुण्य- गरीबों को भोजन, वस्त्र या अनाज दान करना शुभ माना जाता है.
घर में दीपक जलाएं- शाम को घर के मंदिर में दीपक जलाकर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें.
रंगभरी एकादशी पर क्या न करें
झगड़ा या अपशब्द से बचें, मांस-मदिरा का सेवन न करें, किसी का अपमान न करें नकारात्मक सोच से दूर रहें.
क्यों खास है यह दिन?
रंगभरी एकादशी प्रेम, सौहार्द और नए उत्साह का प्रतीक मानी जाती है, धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा और सेवा से घर में सुख-शांति आती है और रिश्तों में मिठास बढ़ती है.
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