Hindu Festivals: भारत में जनवरी महीने में मनाए जाने वाले दो प्रमुख पर्व मकर संक्रांति और पोंगल देखने में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लगते हैं, लेकिन इनके पीछे का भाव, समय और उद्देश्य एक ही है, यही कारण है कि मकर संक्रांति और पोंगल के बीच एक खास और गहरा कनेक्शन माना जाता है.
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सूर्य की चाल से जुड़ा है दोनों पर्वों का आधार
मकर संक्रांति और पोंगल, दोनों ही सूर्य देव को समर्पित पर्व हैं. मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना गया है, वहीं पोंगल भी सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है, खासकर सूर्य पोंगल के दिन.
एक ही समय, अलग नाम
मकर संक्रांति उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी भारत में मनाई जाती है, जबकि दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में इसे पोंगल के रूप में मनाया जाता है. अर्थात, समय एक, भावना एक नाम अलग.
कृषि और फसल से जुड़ा है दोनों का महत्व
दोनों पर्व नई फसल के आगमन और सफल कटाई के उत्सव हैं. किसान अपनी मेहनत के फल के लिए ईश्वर, सूर्य और प्रकृति का धन्यवाद करते हैं. मकर संक्रांति पर दान-पुण्य और तिल-गुड़ का सेवन, पोंगल पर नए धान से बने मीठे पोंगल का भोग दोनों ही परंपराएं समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक हैं.
पोंगल का अर्थ और मकर संक्रांति की भावना
‘पोंगल’ शब्द का अर्थ है उबाल आना, जो समृद्धि के उफान का संकेत देता है. वहीं मकर संक्रांति पर दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं, जिसे सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. दोनों ही पर्व नई शुरुआत का संदेश देते हैं.


























