Advertisement

GanpatiBappaMorya: मोरया का असली मतलब क्या है?

lord ganesh

MoryaMeaning: भारत में गणेश उत्सव आते ही हर गली-मोहल्ले, पंडाल और घरों में एक ही नारा गूंजता है. “गणपति बप्पा मोरया” श्रद्धालु पूरे भाव से यह जयघोष करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसमें प्रयुक्त “मोरया” शब्द का वास्तविक अर्थ क्या है, क्या यह सिर्फ एक परंपरागत शब्द है या इसके पीछे कोई गहरा धार्मिक रहस्य छिपा है? आइए जानते हैं.

खून के रिश्तों में डिजिटल डकैती : बहन-बहनोई ने बीमार भाई के 1.40 करोड़ उड़ा दिए

मोरया का ऐतिहासिक अर्थ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, “मोरया” शब्द का संबंध महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत मोरया गोसावी से माना जाता है. मोरया गोसावी 14वीं शताब्दी के महान गणेश भक्त थे, जिन्होंने पुणे के पास मोरगांव (अष्टविनायक क्षेत्र) में भगवान गणेश की कठोर तपस्या की थी, कहा जाता है कि संत मोरया गोसावी ने अपना पूरा जीवन गणपति भक्ति में समर्पित कर दिया और उन्हीं की स्मृति में भगवान गणेश के साथ “मोरया” नाम जुड़ गया.

भक्ति और आस्था से जुड़ा अर्थ
एक मान्यता यह भी है कि “मोरया” का अर्थ है. हे प्रभु, मेरे कष्टों का नाश कीजिए, मेरे दुख-दर्द अपने साथ ले जाइए. इसी कारण विसर्जन के समय विशेष रूप से “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” का जयघोष किया जाता है, यह भक्त और भगवान के बीच भावनात्मक संवाद का प्रतीक है.

संस्कृत और लोक परंपरा से जुड़ाव
कुछ विद्वानों के अनुसार, “मोरया” शब्द संस्कृत के “मौर्य” या “मोर” (पंख, सौंदर्य, मंगल) से भी जुड़ा माना जाता है, जो शुभता और समृद्धि का संकेत देता है. हालांकि, इसका सबसे प्रचलित और स्वीकार्य अर्थ संत मोरया गोसावी से ही जुड़ा है.

क्यों नहीं कहते सिर्फ “गणपति बप्पा”?
“बप्पा” शब्द अपने आप में पिता के समान स्नेह और अपनापन दर्शाता है, जबकि “मोरया” जोड़ने से यह जयघोष पूर्ण हो जाता है. भक्ति, कृतज्ञता और पीड़ा के समर्पण का भाव, यही कारण है कि यह नारा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि आस्था और भावनाओं का संगम बन गया है.

इसे भी पढ़े-Tuesday Remedies: पढ़ाई में मन नहीं लगता? मंगलवार को जरूर करें ये काम