Pongal Festival: पोंगल दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु का प्रमुख और पारंपरिक पर्व है, यह पर्व हर साल जनवरी महीने में मनाया जाता है और वर्ष 2026 में पोंगल 15 जनवरी से 18 जनवरी तक मनाया जाएगा. पोंगल मुख्य रूप से किसानों, प्रकृति और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का त्योहार है.
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पोंगल क्यों मनाया जाता है?
पोंगल शब्द तमिल भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है “उफनना” या “उबाल आना”. यह समृद्धि, खुशहाली और नई फसल के स्वागत का प्रतीक माना जाता है, इस दिन नए धान से बना मीठा व्यंजन “पोंगल” पकाया जाता है, जब दूध उबलकर बाहर आता है, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है.
किसानों से जुड़ा है पोंगल
पोंगल का सीधा संबंध कृषि और फसल कटाई से है, यह पर्व सफल फसल के लिए ईश्वर और प्रकृति का धन्यवाद करने के उद्देश्य से मनाया जाता है. किसानों के लिए यह त्योहार नई उम्मीदों और समृद्ध भविष्य का प्रतीक है.
सूर्य देव की पूजा
पोंगल पर्व पर सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है, मान्यता है कि सूर्य की कृपा से ही फसलें लहलहाती हैं और जीवन चलता है. इसलिए पोंगल को सूर्य पर्व भी कहा जाता है.
पोंगल के चार प्रमुख दिन
भोगी पोंगल – पुराने नकारात्मक विचारों और वस्तुओं को त्यागने का दिन.
सूर्य पोंगल – सूर्य देव की आराधना का मुख्य दिन.
मट्टू पोंगल – पशुओं, विशेषकर गाय-बैलों के सम्मान का दिन.
कानुम पोंगल – परिवार और समाज के साथ खुशियाँ बाँटने का दिन.
पोंगल 2026 का महत्व
पोंगल 2026 सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण, परिश्रम के सम्मान और सामाजिक एकता का संदेश देता है, यह त्योहार हमें सिखाता है कि जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए प्रकृति और कृषि का सम्मान आवश्यक है.
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