MauniAmavasya: मौनी अमावस्या हिंदू पंचांग का एक अत्यंत पवित्र दिन माना जाता है, इस दिन स्नान, मौन व्रत, जप-तप और दान का विशेष महत्व बताया गया है. श्रद्धालुओं के मन में अक्सर यह प्रश्न रहता है कि मौनी अमावस्या पर अन्न दान श्रेष्ठ है या वस्त्र दान? इस विषय पर शास्त्र क्या कहते हैं, आइए जानते हैं.
आरा भूकंप जागरूकता: DM तनय सुल्तानिया ने रैली को हरी झंडी दिखाई
मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन रहकर किया गया दान और तप कई गुना फल देता है. मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म सीधे देवताओं और पितरों तक पहुंचते हैं. प्रयागराज, हरिद्वार जैसे तीर्थों पर इस दिन स्नान और दान का विशेष विधान है.
शास्त्रों में अन्न दान का महत्व
धर्मग्रंथों में अन्न दान को महादान कहा गया है. मनुस्मृति और गरुड़ पुराण के अनुसार, “अन्नं प्राणाः” — अर्थात अन्न ही प्राण है. मौनी अमावस्या पर अन्न दान करने से भूखे को भोजन मिलता है, जीवन में अन्न की कभी कमी नहीं होती, पितृ दोष और दरिद्रता दूर होती है. इस दिन गरीब, साधु या ब्राह्मण को अन्न दान करना सबसे श्रेष्ठ फल देता है.
वस्त्र दान का शास्त्रीय महत्व
वस्त्र दान को भी शास्त्रों में पुण्यदायी बताया गया है. पद्म पुराण के अनुसार, वस्त्र दान करने से व्यक्ति को मान-सम्मान की प्राप्ति होती है, जीवन में दरिद्रता का नाश होता है, मृत आत्माओं को शांति मिलती है, विशेषकर ठंड के मौसम में मौनी अमावस्या पर वस्त्र दान का महत्व और बढ़ जाता है.
कौन-सा दान है सबसे श्रेष्ठ?
धार्मिक विद्वानों के अनुसार यदि दोनों में से एक चुनना हो तो अन्न दान को सर्वोत्तम माना गया है, यदि सामर्थ्य हो तो अन्न के साथ वस्त्र दान करना अत्यंत पुण्यकारी है, शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि दान की श्रेष्ठता वस्तु से अधिक भावना और श्रद्धा पर निर्भर करती है.
यह भी पढ़े-PeepalTree: हिंदू धर्म में पीपल को इतना पवित्र क्यों माना गया? जानिए


























