Makar Sankranti rituals: मकर संक्रांति 2026 का पर्व हिंदू धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है, यह दिन सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और इसी के साथ उत्तरायण काल की शुरुआत मानी जाती है. इस पावन अवसर पर स्नान, दान और पूजा-पाठ का खास महत्व होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ विशेष आरतियों के बिना मकर संक्रांति की पूजा अधूरी मानी जाती है.
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मकर संक्रांति पर आरती का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की विधिवत पूजा करने से स्वास्थ्य, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है. पूजा के दौरान आरती को अत्यंत आवश्यक माना गया है, क्योंकि आरती के बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती.
ये प्रमुख आरतियां जरूर करें
धार्मिक ग्रंथों और पंडितों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन मुख्य रूप से ये आरतियां करनी चाहिए.
सूर्य देव की आरती– प्रातःकाल पवित्र स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित कर सूर्य आरती करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है.
गायत्री माता की आरती- गायत्री माता को सूर्य की शक्ति का स्वरूप माना जाता है, उनकी आरती से बुद्धि और आत्मबल की प्राप्ति होती है.
भगवान विष्णु की आरती- मकर संक्रांति को भगवान विष्णु का विशेष दिन भी माना जाता है, उनकी आरती से घर में सुख-शांति बनी रहती है.
तुलसी माता की आरती- संध्या समय तुलसी माता की आरती करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में समृद्धि आती है.
आरती न करने से क्या माना जाता है?
मान्यता है कि यदि मकर संक्रांति के दिन पूजा में आरती नहीं की जाती, तो पूजा अधूरी रह जाती है और उसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता. खासकर सूर्य देव की आरती को इस दिन अनिवार्य बताया गया है.
दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व
आरती के साथ-साथ इस दिनतिल-गुड़ का दान, खिचड़ी का भोग, वस्त्र और अन्न दान करने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है.
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