TilDaan: मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन स्नान, पूजा और दान का विशेष महत्व होता है. खास तौर पर तिल दान को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है, लेकिन सवाल यह है कि मकर संक्रांति पर तिल दान ही क्यों किया जाता है?
सुंदर के साथ नाइंसाफी? गंभीर-गिल पर कैफ का तीखा प्रहार, टीम सिलेक्शन पर छिड़ा विवाद
शास्त्रों में तिल का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, तिल को अत्यंत पवित्र माना गया है, मान्यता है कि तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के शरीर से हुई और इसमें देवताओं का वास होता है. यही कारण है कि तिल का प्रयोग हवन, पूजा और दान में विशेष रूप से किया जाता है.
सूर्य देव और तिल का संबंध
मकर संक्रांति सूर्य देव को समर्पित पर्व है, तिल को सूर्य की ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, तिल में उष्ण (गरम) तत्व होता है, जो सर्दियों में शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और सूर्य की कृपा प्राप्त करने में सहायक माना जाता है.
पाप नाश और पुण्य प्राप्ति की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन तिल का दान करने से पिछले जन्मों के पाप नष्ट होते हैं, अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है, इसी कारण इस दिन तिल-गुड़, तिल का तेल और तिल से बनी वस्तुओं का दान श्रेष्ठ माना गया है.
स्वास्थ्य से भी जुड़ा है तिल दान
आयुर्वेद के अनुसार, तिल में कैल्शियम, आयरन और ऊर्जा प्रचुर मात्रा में होती है. सर्दियों के मौसम में तिल का सेवन और दान शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है, इस तरह तिल दान का महत्व धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक भी है.
तिल दान की विधि
मकर संक्रांति के दिन प्रातः स्नान के बाद तिल-गुड़, तिल का तेल, तिल के लड्डू जरूरतमंदों को दान किए जाते हैं. दान करते समय सूर्य देव का स्मरण करना विशेष फलदायी माना जाता है.
ये भी पढ़े-http://MakarSankranti2026: पर पतंग उड़ाने की असली वजह, जानिए


























