Mahashivratri2026: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है, वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी, जिसे भगवान शिव की आराधना और आत्म-संयम का महापर्व माना जाता है, इस दिन लाखों श्रद्धालु उपवास रखकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और रात्रि जागरण करते हैं, लेकिन धर्माचार्यों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि महाशिवरात्रि का व्रत हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होता. बिना जानकारी और शारीरिक क्षमता को समझे रखा गया व्रत कई बार परेशानी का कारण बन सकता है.
किन लोगों को नहीं रखना चाहिए सख्त व्रत
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ लोगों को निर्जला या कठोर व्रत से बचना चाहिए, जिन्हें डायबिटीज, लो ब्लड प्रेशर या हृदय रोग से पीड़ित लोग है.गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग, अत्यधिक कमजोरी या कुपोषण से ग्रस्त व्यक्ति वहीं लखनऊ के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अनिल मिश्रा बताते हैं कि लंबे समय तक भूखा रहना कुछ लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है, ऐसे में फलाहार या दूध आधारित व्रत अधिक सुरक्षित विकल्प है.
मानसिक और शारीरिक अवस्था भी जरूरी
धर्माचार्यों का कहना है कि व्रत केवल भूखा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक शुद्धता और संयम की साधना है. यदि व्यक्ति मानसिक तनाव, क्रोध या अस्वस्थ मनःस्थिति में है, तो व्रत का आध्यात्मिक लाभ कम हो जाता है. शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि व्रत वही सफल होता है, जो श्रद्धा और नियमों के साथ किया जाए, शरीर या मन असमर्थ हो तो व्रत का स्वरूप बदला जा सकता है.
शास्त्र क्या कहते हैं?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, महाशिवरात्रि व्रत में सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य, रात्रि जागरण और शिव ध्यान का विशेष महत्व है, नियमों की अनदेखी से व्रत का पुण्य घट सकता है.
सही विकल्प क्या हैं?
जो लोग सख्त उपवास नहीं रख सकते, वे फलाहार या एक समय भोजन कर सकते हैं, केवल शिव नाम जप और ध्यान से भी पुण्य प्राप्त कर सकते हैं, दान-पुण्य और सेवा कार्य को व्रत का हिस्सा बना सकते हैं.
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