Mahashivratri2026: महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग पर अभिषेक कर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हैं, मान्यता है कि इस दिन सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा जीवन की बाधाओं को दूर करती है, लेकिन धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में कुछ ऐसी गलतियों का भी उल्लेख है, जिनसे बचना आवश्यक माना गया है. आइए जानते हैं वे 7 प्रमुख गलतियां क्या क्या है.
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ये हैं 7 गलतियां कि तो हो सकते हैं भोलेनाथ नाराज
1. गलत सामग्री चढ़ाना- शिवलिंग पर केतकी का फूल, तुलसी, हल्दी या टूटा हुआ बेलपत्र चढ़ाना वर्जित माना गया है, पूजा में शुद्ध और उचित सामग्री का ही प्रयोग करें.
2. खंडित या गंदा बेलपत्र अर्पित करना- बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, लेकिन यह तीन पत्तियों वाला, साफ और बिना कटा-फटा होना चाहिए.
3. पूजा में अशुद्धता- बिना स्नान किए या मन में अशुद्ध भाव रखकर पूजा करना अनुचित माना गया है, पूजा से पहले शारीरिक और मानसिक शुद्धि आवश्यक है.
4. शिवलिंग की गलत परिक्रमा- मान्यता है कि शिवलिंग की पूरी गोल परिक्रमा नहीं करनी चाहिए. जलधारा (जहां से जल बहता है) को पार किए बिना अर्धचंद्राकार परिक्रमा करना उचित माना जाता है.
5. व्रत में अनुशासन की कमी- महाशिवरात्रि व्रत में सात्विक आहार और संयम का विशेष महत्व है. नशा, तामसिक भोजन या क्रोध से बचना चाहिए.
6. अभिषेक में जल्दबाजी- दूध, जल या पंचामृत चढ़ाते समय श्रद्धा और शांति बनाए रखें, जल्दबाजी या दिखावे के लिए पूजा करना उचित नहीं माना गया है.
7. मंत्रोच्चारण में लापरवाही- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का उच्चारण शुद्ध भाव और ध्यान के साथ करना चाहिए. बिना ध्यान के केवल औपचारिक जाप करना लाभकारी नहीं माना जाता.
क्या करें?
महाशिवरात्रि पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें. सादगी, संयम और श्रद्धा के साथ की गई पूजा ही भगवान शिव को प्रिय होती है. धार्मिक विद्वानों के अनुसार, भगवान शिव भोलेनाथ हैं और सच्चे मन से की गई भक्ति को ही स्वीकार करते हैं, इसलिए नियमों का ध्यान रखते हुए श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करें.
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