LohriRituals: लोहड़ी का त्योहार हर साल 13 जनवरी को पूरे उत्तर भारत में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. यह पर्व ठंड के मौसम में खुशियों, समृद्धि और फसल की बधाई का प्रतीक है. लोहड़ी की सबसे खास परंपरा आग के चारों ओर परिक्रमा करना है, लेकिन सवाल यह है कि आग के चारों ओर कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए और इसका सही तरीका क्या है?
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परिक्रमा का महत्व
लोहड़ी की आग केवल गर्मी देने के लिए नहीं, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक भी है. आग के चारों ओर परिक्रमा करने से पुरानी नकारात्मकताओं से मुक्ति मिलती है और नए साल की शुरुआत शुभ मानी जाती है.
कितनी बार परिक्रमा करें?
वास्तविक मान्यता और लोक परंपरा के अनुसार, कम से कम एक परिक्रमा हर सदस्य को आग के चारों ओर एक बार परिक्रमा करना जरूरी माना जाता है. वहीं तीन परिक्रमा (सर्वश्रेष्ठ तरीका) कुछ पारंपरिक विद्वान और पुजारियों के अनुसार तीन बार परिक्रमा करना अधिक शुभ माना जाता है.
परिक्रमा करते समय ध्यान रखें
हमेशा सूर्य की दिशा में या दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर चलते हुए परिक्रमा करें. गुड़, तिल, मूंगफली जैसे अनाज आग में अर्पित करें, परिक्रमा के दौरान मन में शुभकामनाएं और धन्यवाद की भावना रखें.
बच्चों और परिवार के लिए
परिक्रमा का यह नियम केवल बड़े लोगों के लिए नहीं है, बल्कि बच्चों को भी इसमें शामिल करना चाहिए, इससे बच्चों में परंपरा और संस्कृति के प्रति सम्मान पैदा होता है.
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