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Lohri Celebration: लोहड़ी और गुरुद्वारे: ये परंपरा हर साल क्यों होती है खास!

Lohri Paying at the Gurudwara

On Lohri Paying at the Gurudwara: उत्तर भारत में हर साल 13 जनवरी को मनाई जाने वाली लोहड़ी सिर्फ फसल का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आस्था, संस्कृति और परिवारिक एकता का प्रतीक भी है. इस दिन सिर्फ आग जलाना ही नहीं, बल्कि कई लोग गुरुद्वारों में माथा टेककर इस पर्व को खास बनाते हैं.

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लोहड़ी का धार्मिक महत्व
लोहड़ी का त्योहार सूर्य की उत्तरायण गति के साथ जुड़ा है, यह पर्व पुराने साल की परेशानियों को छोड़कर नए साल में खुशियां और समृद्धि लाने का संदेश देता है. आग के चारों ओर परिक्रमा और आशीर्वाद लेना इसे और भी पवित्र बनाता है.

गुरुद्वारे और लोहड़ी
लोहड़ी पर कई लोग अपने परिवार के साथ निकटतम गुरुद्वारे में माथा टेकते हैं. गुरुद्वारे में माथा टेकने की परंपरा यह याद दिलाती है कि ईश्वर की आशीर्वाद से ही खुशियां और समृद्धि मिलती हैं. कुछ प्रमुख बातें गुरुद्वारे में माथा टेकना परिवारिक एकता और आस्था का प्रतीक है. लोहड़ी पर गुरुद्वारे में जाने से धार्मिक और सामाजिक जुड़ाव मजबूत होता है, यह परंपरा विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में बड़े उत्साह के साथ निभाई जाती है.

लोककथा और परंपरा
लोहड़ी की आग और गुरुद्वारों से जुड़ी परंपराएं केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं. इनमें लोककथा, सांस्कृतिक गीत और दुल्ला भट्टी की वीरता की यादें भी जुड़ी होती हैं. बच्चों को ये परंपराएं सुनाकर संस्कार और संस्कृति की शिक्षा दी जाती है.

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