KashiHoli2026: दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी मानी जाने वाली वाराणसी में होली का एक अनोखा और रहस्यमयी रूप भी देखने को मिलता है, यहां के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर कुछ साधु-संत और अघोरी परंपरा के लोग श्मशान में विशेष तरीके से होली मनाते हैं, जिसे देखने देश-विदेश से लोग आते हैं.
Varun Chakravarthy बने ‘Impact Player’ – नीदरलैंड्स पर जीत के बाद मिला खास मेडल
क्या है श्मशान की होली की परंपरा?
काशी में मान्यता है कि जीवन और मृत्यु एक ही चक्र के दो पहलू हैं, इसी दर्शन को मानते हुए कुछ साधु श्मशान में राख और गुलाल के साथ होली खेलते हैं. यह किसी डर या अंधविश्वास का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन की नश्वरता और आत्मा की अमरता का संदेश देता है.
शिव भक्ति और अघोरी परंपरा से जुड़ाव
इस परंपरा का संबंध भगवान शिव की आराधना से भी जोड़ा जाता है. अघोरी साधु मानते हैं कि शिव श्मशान के स्वामी हैं, इसलिए श्मशान में होली खेलना वैराग्य और भक्ति का प्रतीक है. यह उत्सव भय को छोड़कर जीवन को समझने की सीख देता है.
क्यों कहा जाता है रहस्यमयी?
श्मशान घाट पर जलती चिताओं के बीच रंग-गुलाल और भजन-कीर्तन का दृश्य लोगों को चौंका देता है. आम होली से अलग यह परंपरा रहस्य और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम है, इसलिए इसे “काशी की रहस्यमयी होली” कहा जाता है.
पर्यटकों के लिए आकर्षण
हर साल होली के आसपास बड़ी संख्या में पर्यटक और फोटोग्राफर इस अनोखी परंपरा को देखने आते हैं, प्रशासन भी सुरक्षा और व्यवस्था का खास ध्यान रखता है.
क्या है इसका संदेश?
जीवन-मृत्यु का सत्य स्वीकार करना, भय से मुक्ति और वैराग्य, आध्यात्मिकता और शिव भक्ति, काशी की अनोखी सांस्कृतिक विरासत है.
ये भी पढ़े-Ramadan 2026: आज है रमजान का पहला जुमा! जानें क्यों है यह दिन खास


























