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MaghPurnimaPuja: माघ पूर्णिमा पर सिर्फ स्नान नहीं! जानिए किसकी पूजा जरूरी है

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MaghPurnimaPuja2026: हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा कहा जाता है. आमतौर पर इस दिन गंगा और संगम में स्नान को ही सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा पर केवल स्नान ही नहीं, विशेष देवताओं की पूजा भी अनिवार्य मानी गई है, सही देवता की पूजा के बिना इस दिन का पुण्य अधूरा रह सकता है.

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भगवान विष्णु की पूजा क्यों जरूरी
पुराणों में माघ मास को भगवान विष्णु का प्रिय मास बताया गया है, पद्म पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा पर विष्णु पूजन करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. पूजा में पीले फूल, तुलसी दल, चंदन और घी का दीपक अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है.

सूर्य देव की उपासना का महत्व
माघ पूर्णिमा के दिन सूर्य देव को अर्घ्य देना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि सूर्य आरोग्य, तेज और यश के दाता हैं. प्रातः स्नान के बाद जल में लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य को अर्घ्य देने से रोगों से मुक्ति और मानसिक शांति मिलती है.

गंगा और पवित्र नदियों की पूजा
इस दिन गंगा माता को केवल स्नान का माध्यम नहीं, बल्कि पूजनीय देवी माना गया है. गंगा जल से आचमन कर, दीपदान और पुष्प अर्पण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.

चंद्र देव की पूजा भी विशेष
पूर्णिमा तिथि होने के कारण चंद्र देव की पूजा का भी महत्व है, मान्यता है कि चंद्रमा मन और भावनाओं को नियंत्रित करते हैं, इस दिन चंद्र देव को दूध या जल अर्पित करने से मानसिक तनाव कम होता है.

साधु-संतों और ब्राह्मणों का सम्मान
शास्त्रों में माघ पूर्णिमा पर संत, ब्राह्मण और अतिथि को भोजन व दान देना देव पूजा के समान माना गया है. इसे ‘नर सेवा, नारायण सेवा’ कहा गया है.

पूजा के साथ संयम जरूरी
धर्माचार्यों का कहना है कि माघ पूर्णिमा पर पूजा तभी पूर्ण मानी जाती है जब व्यक्ति सत्य, संयम और सात्विक आचरण का पालन करे.

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