HinduRituals: हिंदू धर्म में पूजा के बाद बची राख (भस्म) को अत्यंत पवित्र माना जाता है, यह केवल अग्नि की शेष सामग्री नहीं, बल्कि आस्था और शुद्धता का प्रतीक मानी जाती है. धर्मग्रंथों और विद्वानों के अनुसार पूजा की राख को रखने और उपयोग करने के भी कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना जाता है.
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पूजा की राख का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यज्ञ या दीपक की अग्नि में समर्पित सामग्री देवताओं को अर्पित होती है, उसी अग्नि से प्राप्त राख को शुभ और कल्याणकारी माना जाता है. विशेष रूप से शिव पूजा में भस्म का अलग ही महत्व बताया गया है.
राख कहाँ रखें
धर्माचार्यों के अनुसार पूजा की राख को निम्न स्थानों पर रखा जा सकता है.
पूजा स्थल पर: राख को किसी साफ़ पात्र में भरकर मंदिर या पूजा घर में रखना उचित माना गया है.
तुलसी के पौधे के पास: कुछ विद्वानों के अनुसार तुलसी के पास थोड़ी-सी राख रखना सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.
पवित्र स्थान पर विसर्जन: यदि राख अधिक हो जाए, तो उसे नदी, सरोवर या किसी पवित्र वृक्ष की जड़ में सम्मानपूर्वक विसर्जित करना चाहिए.
कैसे रखें और कैसे न रखें
राख को कूड़ेदान या नाली में फेंकना धार्मिक दृष्टि से अनुचित माना गया है, राख को हमेशा साफ और सूखे पात्र में रखें, बच्चों के खेलने की जगह या पैरों तले आने वाली जगह पर राख रखना वर्जित माना गया है. राख का उपयोग तिलक या रक्षा सूत्र के रूप में केवल श्रद्धा के साथ करें.
क्या कहते हैं विद्वान
पंडित रविनंदन शास्त्री जी कहते हैं कि पूजा की राख को अपवित्र स्थान पर डालना शास्त्रसम्मत नहीं है, इसे सम्मान के साथ रखना या विसर्जित करना चाहिए.
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