Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रहा है और 27 मार्च को समाप्त होगा, यह पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना के लिए समर्पित होता है. इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करते हैं और कई विशेष परंपराओं का पालन करते है, इन्हीं में से एक है नवरात्रि के पहले दिन जौ (जवारे) बोना.
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जौ बोने का धार्मिक महत्व
नवरात्रि में जौ बोना शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जौ को मां दुर्गा का प्रिय अन्न माना जाता है. कलश स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है, यह नई फसल और जीवन की उन्नति का संकेत भी देता है.
पौराणिक कथा
मान्यता है कि प्राचीन काल में जब देवी-देवताओं ने असुरों के खिलाफ युद्ध किया, तब जौ का उपयोग पूजा में किया गया था, इसके बाद से ही नवरात्रि में जौ बोने की परंपरा शुरू हो गई. इसे विजय, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
जौ उगने से जुड़े संकेत
नवरात्रि के दौरान बोए गए जौ की वृद्धि को बहुत शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि अगर जौ तेजी से और हरे-भरे उगते हैं, तो यह घर में सुख-समृद्धि आने का संकेत होता है. वहीं जौ का कमजोर उगना कुछ बाधाओं का संकेत माना जाता है.
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