Navratri Kanya Pujan: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व दुर्गा अष्टमी इस वर्ष 26 मार्च 2026 को मनाया जाएगा, इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा के साथ-साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी सेवा करने से माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं.
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कौन सी उम्र की कन्या का पूजन करें?
कन्या पूजन के लिए सामान्यत: 2 से 10 वर्ष की कन्याओं का चयन किया जाता है, मान्यता है कि इस उम्र की कन्याएं पूर्ण रूप से शुद्ध और निष्ठावान मानी जाती हैं, और इन्हें माता का रूप मानकर पूजन करने से विशेष फल मिलता है.
कन्या पूजन की विधि
सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को स्वच्छ करें, मां महागौरी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं, कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोएं और तिलक करें. उन्हें फूल, अक्षत, हल्दी, चावल और गुड़ अर्पित करें, इसके बाद कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा व उपहार दें. पूजा के दौरान “ॐ देवी महागौर्यै नमः” मंत्र का जाप करें.
कन्या पूजन का समय
महाअष्टमी के दिन सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक का समय सबसे शुभ माना जाता है, इस समय कन्या पूजन करने से माता रानी की कृपा अधिक प्राप्त होती है.
कन्या पूजन का महत्व
कन्या पूजन से न केवल घर में सुख-समृद्धि आती है, बल्कि जीवन में नकारात्मक शक्तियों और भय से मुक्ति भी मिलती है, यह धार्मिक परंपरा भक्तों में सेवा, विनम्रता और भक्ति भाव को बढ़ाने का अवसर देती है.
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