Maa Chandraghanta Puja: आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है और इस दिन मां दुर्गा की तीसरी शक्ति मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है, यह दिन विशेष रूप से शक्ति, साहस और शांति का प्रतीक माना जाता है. भक्त इस दिन माता की आराधना कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और निर्भयता की कामना करते हैं.
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क्यों शक्तिशाली है मां चंद्रघंटा का रूप?
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और वीरता से भरा हुआ है, उनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटी के आकार में सुशोभित होता है, जो उनकी पहचान है. उनका यह रूप युद्ध के लिए सदैव तैयार रहने वाला और बुराइयों का नाश करने वाला माना जाता है. माता के दस हाथों में अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र होते हैं और वे सिंह पर सवार रहती हैं, यह रूप दर्शाता है कि वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए हर समय तत्पर हैं और किसी भी संकट से उन्हें बचा सकती हैं.
भय और नकारात्मकता का अंत– धार्मिक मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से व्यक्ति के सभी भय दूर हो जाते हैं, उनके आशीर्वाद से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और जीवन में साहस व आत्मविश्वास का संचार होता है.
शांति और संतुलन का प्रतीक- जहां एक ओर उनका रूप उग्र और शक्तिशाली है, वहीं दूसरी ओर वे शांति और करुणा की देवी भी हैं, उनकी आराधना से मानसिक तनाव कम होता है और मन को शांति मिलती है.
पूजा का महत्व
इस दिन मां चंद्रघंटा को दूध, मिठाई और सफेद वस्त्र अर्पित करना शुभ माना जाता है, “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” मंत्र का जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है.
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