Brahmin Politics in Uttar Pradesh: 2027 का सियासी समर शुरू हो चुका है. वक्त का पहिया जैसे जैसे सरक रहा है सियासी समीकरण, षड़यंत्र और साजिश शुरू हो चुकी है. सभी अपनी तरकश से अपने राजनीतिक तीर एक दूसरे पर छोड़ रहे हैं. आरोप-प्रत्यारोप का शुरुआती दौर है. मौसम के मुताबिक सियासी पारा भी चढ़ने की उम्मीद है.
इसी चक्र में जातियों की भी गोलबंदी शुरू हो चुकी है. नेता अपनी-अपनी जातियों की बात कर हक-हिसाब दिलाने की बात करने लगे हैं. पिछले करीब 5 महीनों में लगभग 10 विवाद ब्राह्मणों को लेकर सामने आए हैं. इनमें कुछ विवाद ऐसे हैं, जिसे परिस्थितियों की वजह से उपजा हुआ माना जा सकता है, लेकिन कुछ ऐसे हैं, जिन्हें देखकर सवाल उठता है कि ये महज़ संयोग है या फिर प्रयोग है.
- ब्राह्मण विधायकों की बैठक
- ‘घूसखोर पंडत’ फिल्म विवाद
- अविमुक्तेश्वरानंद विवाद
- डिप्टी सीएम की बटुक पूजा
- यूपी के अधिकारियों का जाति के नाम पर इस्तीफा विवाद
- यूजीसी गाइडलाइन विवाद में ब्राह्मण सबसे आगे
- पुलिस भर्ती बोर्ड का विवादित सवाल
- स्कूल के पेपर में भी विवाद
ब्राह्मण की कितनी है आबादी?
यूपी में ब्राह्मण आबादी पर तमाम चर्चाएं होती रही हैं. इसमें कोई दोराय नहीं है कि देश की सबसे बड़ी ब्राह्मण आबादी उत्तर प्रदेश में है. आनुपातिक रूप से दावा भले बढ़ा-चढ़ाकर किया जाता हो. मगर, जाटव और यादव और ब्राह्मण की आबादी करीब करीब बराबर है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूपी में ब्राह्मण 10-12% है. जातिगत जनगणना 1931 के हिसाब से इनकी वर्तमान एस्टीमेट आबादी 5-6 फीसदी है.
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आबादी से दोगुना असर
जिस राज्य में अयोध्या मथुरा काशी जैसे तीर्थ स्थल हों, प्रयागराज जैसे कुंभ महाकुंभ स्थल हों, वहां ब्राह्मणों की सांस्कृतिक सामाजिक दखल बड़े स्तर पर दिखेगी. इसी सामाजिक परिवेश में राजनीति होती है तो उस पर भी इसका असर साफ दिखता है.
हक-हिस्सेदारी की बात
कांग्रेस ने शुरुआत में अधिकतर मुख्यमंत्री ब्राह्मण बनाए. इस कारण एकाधिकार था, लेकिन अब समय के साथ बदली राजनीति में एकाधिकार खत्म हुआ है. दरअसल देश और उत्तर प्रदेश में आबादी के लिहाज से सबसे बड़ा तबका ओबीसी वर्ग है. इस वर्ग में तमाम जातियां आती हैं. ओबीसी वर्ग यूपी और देश में BJP की सफलता की चाबी है. भगवा पार्टी ओबीसी वर्ग की राजनीति ताकत जानती है. यही कारण है कि BJP ने मुख्यमंत्री बनाने से सरकार में मंत्री बनाना हो या आयोगों में हिस्सेदारी देनी हो, इस वर्ग को मिल रही.
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BSP और SP के साथ रह चुका है यह समाज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJPओबीसी वर्ग को ध्यान में रखकर पार्टी की रणनीति बना रही है. BJPदिल खोलकर मैदान में उतार रही और ओबीसी नेता विधानसभाओं से लेकर संसद में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे. यूपी में जो ब्राह्मण जाति कभी कांग्रेस का वोटर हुआ करती थी, वह बाद से समय में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के साथ रही. मगर, वर्तमान में ब्राह्मण समाज पूरी तरह से BJPके लिए वफादार है.
यूपी में ब्राह्मण की ताकत कितनी?
यूपी में आबादी के लिहाज से तीसरी सबसे बड़ी आबादी ब्राह्मणों की है. ये 110 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखते हैं. यह सीटें ऐसी हैं, जहां ब्राह्मण मतदाता निर्णायक हैं. इन सीटों पर ब्राह्मण वोट बैंक जीत-हार तय करते हैं. मतलब यह समाज कुल मतदाताओं का छोटा प्रतिशत भले हो, लेकिन कई सीटों पर मजबूत मौजूदगी और मतदान पैटर्न जीत के नतीजे पर असर डाल सकते हैं.
दलों के लिए रणनीतिक महत्व
BJPके लिए ब्राह्मण वोट बहुत मायने रखते हैं. लंबे समय से ब्राह्मण वोटरों ने BJPपर भारी भरोसा किया है. 2014, 2017, 2019, 2022 और 2024 जैसे चुनावों में भरोसा जताया है. इन चुनावों में ब्राह्मणों का 72% से 82% से ज्यादा वोट BJPको मिला था. इस कारण BJPके लिए ब्राह्मण वोट बेहद खास है. यह वोट बैंक तब और खास हो जाता है, जिन जिलों में ब्राह्मणों की संख्या 15 फीसदी से ऊपर है. ताजा घटनाक्रम को देखते हुए प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी सपा ब्राह्मण समाज को अपनी ओर आकर्षित कर रही.

























