नई दिल्ली : शिवसेना (NDA) के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा ने नई दिल्ली में विश्व हिन्दू परिषद के संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे जी से महत्वपूर्ण भेंट कर राष्ट्रजीवन से जुड़े अनेक समसामयिक, वैचारिक और संगठनात्मक विषयों पर विस्तृत चर्चा की।
यह बैठक केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि राष्ट्रवादी विचारधारा, हिंदुत्वनिष्ठ सामाजिक चेतना और भारत की सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण एवं सशक्तीकरण के लिए आवश्यक समन्वय, संवाद और दिशा पर केंद्रित एक गंभीर विमर्श थी।
बैठक में विशेष रूप से इस बात पर बल दिया गया कि वर्तमान समय में भारत केवल राजनीतिक परिवर्तन के दौर से नहीं गुजर रहा, बल्कि एक गहरे सांस्कृतिक पुनर्जागरण, सभ्यतागत आत्मबोध और राष्ट्रीय पुनर्स्थापन के युग में प्रवेश कर चुका है। ऐसे समय में राष्ट्रवादी, हिंदुत्वनिष्ठ और समाजनिष्ठ शक्तियों के बीच वैचारिक स्पष्टता, संगठनात्मक एकता और जमीनी स्तर पर परस्पर सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
दोनों नेताओं के बीच निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई:
भारत की सनातन पहचान, उसकी सांस्कृतिक निरंतरता और हिंदू समाज की संगठित शक्ति को राष्ट्रीय स्थिरता का मूल आधार मानते हुए यह विचार रखा गया कि हिंदू समाज का सशक्त, सजग और सुव्यवस्थित संगठन ही भारत को दीर्घकालिक रूप से वैचारिक और सामाजिक आक्रमणों से सुरक्षित रख सकता है।
सनातन धर्म की रक्षा, प्रतिष्ठा और प्रसार पर विशेष चर्चा हुई। यह स्पष्ट रूप से माना गया कि सनातन केवल पूजा पद्धति का विषय नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, जीवनदृष्टि, कर्तव्यबोध और सभ्यतागत चरित्र का मूल स्वर है। नई पीढ़ी के भीतर सनातन मूल्यों, धर्माधारित नैतिकता और राष्ट्रीय चेतना के प्रसार को समय की केंद्रीय आवश्यकता बताया गया।
गौसंरक्षण को केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय न मानकर भारतीय कृषि, ग्राम्य जीवन, परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक आत्मसम्मान से जुड़ा राष्ट्रीय विषय बताया गया। इस दिशा में व्यापक सामाजिक जागरण और संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
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सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकात्मता के संदर्भ में यह विचार व्यक्त किया गया कि राष्ट्रविरोधी, विघटनकारी, धर्मांतरणकारी और सांस्कृतिक रूप से विघटन फैलाने वाली शक्तियों का प्रभावी उत्तर केवल एक जागृत, संगठित और समरस हिंदू समाज ही दे सकता है। समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद, सम्मान और एकात्म भाव को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर सहमति बनी।
युवा शक्ति की भूमिका पर भी गंभीर विचार-विमर्श हुआ। यह माना गया कि भारत के भविष्य को सुरक्षित, शक्तिशाली और सांस्कृतिक रूप से जागृत बनाने के लिए ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करनी होगी जो राष्ट्रनिष्ठ, अनुशासित, वैचारिक रूप से स्पष्ट और सेवा-भाव से प्रेरित हो।
सेवा, संगठन और समाज-आधारित जनजागरण को हिंदुत्व की जीवंत अभिव्यक्ति बताते हुए शिक्षा, संस्कार, सेवा और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
भेंट के दौरान डॉ. अभिषेक वर्मा ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी सनातन जड़ों, सांस्कृतिक स्वाभिमान और संगठित हिंदू समाज में निहित है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल राजनीतिक विजय की नहीं, बल्कि वैचारिक दृढ़ता, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और राष्ट्रहित में समर्पित व्यापक सामाजिक एकजुटता की है।
डॉ. वर्मा ने विश्व हिन्दू परिषद द्वारा हिंदू समाज के संगठन, धर्मजागरण, सेवा, गौसंरक्षण और सामाजिक चेतना के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि ऐसे प्रयास राष्ट्र की आत्मा को सुदृढ़ करते हैं तथा भारत को उसकी मूल सभ्यतागत चेतना से जोड़ते हैं।























