Ayurveda vs Allopathy: आज के समय में लोग इलाज के लिए आयुर्वेद और एलोपैथी दोनों का सहारा लेते हैं, लेकिन अक्सर सवाल उठता है कि आखिर कौन-सा तरीका ज्यादा असरदार है? सच्चाई यह है कि दोनों चिकित्सा पद्धतियों की अपनी-अपनी खासियत और सीमाएं हैं.
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क्या है आयुर्वेद?
आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जिसका वर्णन चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे ग्रंथों में मिलता है. आयुर्वेद बीमारी की जड़ पर ध्यान देता है, इसमें जड़ी-बूटी, खानपान, योग और दिनचर्या पर जोर दिया जाता है.
आयुर्वेद के फायदे
साइड इफेक्ट कम, शरीर की प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, लंबे समय की बीमारियों में फायदेमंद.
सीमाएं– असर धीरे-धीरे होता है, हर बीमारी में तुरंत राहत नहीं.
क्या है एलोपैथी?
एलोपैथी आधुनिक चिकित्सा प्रणाली है, जिसे वैज्ञानिक शोध और परीक्षणों के आधार पर विकसित किया गया है.
एलोपैथी के फायदे
तुरंत राहत मिलती है, इमरजेंसी और सर्जरी में बेहद जरूरी, गंभीर बीमारियों का प्रभावी इलाज.
सीमाएं– कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट हो सकते हैं, लंबे समय तक दवा लेनी पड़ सकती है.
कौन ज्यादा असरदार?
छोटी या पुरानी बीमारियों में आयुर्वेद बेहतर विकल्प हो सकता है, गंभीर या अचानक बीमारी में एलोपैथी ज्यादा जरूरी होती है. डॉक्टरों के अनुसार, सही तरीका यह है कि मरीज अपनी बीमारी और जरूरत के हिसाब से इलाज चुने और विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.
क्या दोनों साथ चल सकते हैं?
आजकल “इंटीग्रेटिव मेडिसिन” का चलन बढ़ रहा है, जिसमें आयुर्वेद और एलोपैथी दोनों का संतुलित उपयोग किया जाता है.
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