HanumanChalisa: हनुमान चालीसा का पाठ देशभर में करोड़ों श्रद्धालु नियमित रूप से करते हैं. मान्यता है कि इसके पाठ से भय, रोग और संकट दूर होते हैं, लेकिन धर्माचार्यों और ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ विशेष समय और परिस्थितियों में हनुमान चालीसा का पाठ करने से अपेक्षित फल नहीं मिलता, बल्कि कई बार इसका प्रभाव उल्टा भी हो सकता है.
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इन समयों में बरतें विशेष सावधानी
धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, हनुमान चालीसा का पाठ अशुद्ध अवस्था में नहीं करना चाहिए.
नशे की अवस्था: पाठ करना वर्जित माना गया है.
अत्यधिक क्रोध, मानसिक अशांति या अपवित्र मनः स्थिति में पाठ से साधना निष्फल हो जाती है.
शौच या स्नान के बिना, गंदे वस्त्रों में पाठ करने से धार्मिक नियमों का उल्लंघन होता है.
देर रात या अनुचित स्थान पर पाठ
धर्मशास्त्रों में यह भी उल्लेख है कि अत्यंत देर रात, श्मशान या शोर-शराबे वाले स्थानों पर बिना विधि-विधान के पाठ से बचना चाहिए. भक्ति के साथ स्थान और वातावरण की शुद्धता भी उतनी ही आवश्यक है.
सही समय और विधि क्या है?
हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए प्रातःकाल या संध्या समय को श्रेष्ठ माना गया है, साफ वस्त्र पहनकर, शांत मन से, दीप या धूप जलाकर पाठ करना लाभकारी होता है. मंगलवार और शनिवार को इसका विशेष महत्व बताया गया है.
युवाओं में बढ़ी रुचि, पर जानकारी की कमी
हाल के वर्षों में युवाओं के बीच हनुमान चालीसा पाठ की लोकप्रियता बढ़ी है, खासकर तनाव और मानसिक दबाव के दौर में, हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि आस्था के साथ सही जानकारी का अभाव कई बार साधना को अधूरा छोड़ देता है.
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