Mahashivratri2026: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि को भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन पर्व माना जाता है, हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है. यह पर्व केवल एक दिन की पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि रात के चारों पहर में विधि-विधान से की जाने वाली पूजा इसका मुख्य आधार है. मान्यता है कि जो भक्त महाशिवरात्रि की रात चारों पहर शिव पूजन करता है, उसे विशेष पुण्य और शिव कृपा प्राप्त होती है.
IPL-WPL दोनों में चैंपियन, 3 साल में 3 ट्रॉफी ऐसा करने वाली पहली टीम बनी RCB
चारों पहर की पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार महाशिवरात्रि की रात्रि में भगवान शिव स्वयं पृथ्वी पर विचरण करते हैं, इस दौरान की गई पूजा, अभिषेक और जागरण अत्यंत फलदायी माना जाता है. चारों पहर की पूजा भक्ति, संयम और साधना का प्रतीक है.
चार पहर, चार अर्थ
महाशिवरात्रि की रात को चार भागों में बाँटा गया है प्रथम पहर: आत्मशुद्धि और संकल्प का समय द्वितीय पहर: मन की स्थिरता और भक्ति तृतीय पहर: ध्यान और जागरण चतुर्थ पहर: मोक्ष और शिव तत्व की प्राप्ति, प्रत्येक पहर में अलग-अलग सामग्री से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है, जैसे जल, दूध, दही, घी और शहद.
क्यों जरूरी है रात्रि जागरण?
महाशिवरात्रि में रात्रि जागरण का विशेष महत्व है, मान्यता है कि जो भक्त इस रात जागकर शिव भजन, मंत्र जाप और पूजा करता है, उसके जीवन से अज्ञान और नकारात्मकता दूर होती है. चारों पहर की पूजा इसी जागरण को पूर्णता प्रदान करती है.
क्या फल मिलता है चारों पहर की पूजा से?
पापों से मुक्ति मानसिक शांति और आत्मबल, रोग, भय और कष्टों से राहत, वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि, मोक्ष की प्राप्ति.
ये भी पढ़े-http://FalgunAmavasya2026: दान-स्नान का महापर्व,फाल्गुन अमावस्या कब मनाई जाएगी?


























