नई दिल्ली: 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आम बजट 2026-27 पेश किया, लेकिन बजट प्रस्तुति के बाद भारतीय शेयर बाजारों ने ऐतिहासिक गिरावट का सामना किया। इस गिरावट को पिछले छह वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट कहा जा रहा है, जिससे निवेशकों को कुल मिलाकर करीब ₹9.40 लाख करोड़ का नुकसान हुआ।
बाजार में भारी गिरावट
बजट भाषण के दौरान और बाद में बाजार में भारी बेच-बिक्री का माहौल रहा:
- बीएसई सेंसेक्स एक समय लगभग 2,370 अंक तक गिर गया और अंत में 1,546.84 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ।
- निफ्टी 50 में भी करीब 495 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।
- बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मार्केट कैप में ₹9.40 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ।
क्यों गिरे बाजार?
इस गिरावट के पीछे कई प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं:
🔹 एसटीटी (Securities Transaction Tax) में वृद्धि
सरकार ने बजट में डेरिवेटिव सेगमेंट पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।
- फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02% से 0.05%,
- विकल्पों (Options) पर 0.1% से 0.15% कर दिया गया।
इससे ट्रेडिंग की लागत बढ़ गई, जिससे निवेशकों खासकर डेरिवेटिव ट्रेडर्स ने मुनाफा निकाला और बाजार में बेच-बिक्री बढ़ी।
विदेशी निवेशकों की चिंता
बजट में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने वाले नए उपायों की कमी और बढ़े टैक्स के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने बिकवाली बढ़ाई, जिससे बाजार में दबाव बना। बाजार की अनिश्चितता बढ़ने से निवेशकों का आत्म-विश्वास कमजोर हुआ।
निवेशकों पर असर
बाजार के इस तेज़ गिरावट से:
- सरकारी बैंकों के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई,
- बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे शेयर भी भारी नुकसान में रहे,
- बाजार में अस्थिरता का सूचक वीआईएक्स (VIX) लगभग 12 प्रतिशत तक बढ़ा।
इन संकेतों से न सिर्फ बड़ी शेयर कंपनियों बल्कि मिड-कैप, स्मॉल-कैप तक भारी असर दिखा।
विश्लेषकों का कहना
कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि एसटीटी वृद्धि और बजट में कुछ सेक्टरों को अपेक्षित राहत न मिलने से निवेशकों ने जोखिम कम करना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में बिकवाली तेज़ हुई। वहीं, सरकार का मानना है कि टैक्स परिवर्तन का उद्देश्य बाजार को अधिक स्थिर और दीर्घकालिक बनाने का है।
निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया बजट 2026-27 का बजट आर्थिक सुधारों और दीर्घकालिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण था, लेकिन स्टॉक मार्केट की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही, जिससे निवेशकों को ₹9.40 लाख करोड़ तक का नुकसान उठाना पड़ा। इस गिरावट ने बाजारों में अस्थिरता और निवेशकों की भावनाओं पर गहरा प्रभाव डाला है।
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