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VastuTips: मुख्य द्वार की सही दिशा कौन-सी? वास्तु शास्त्र के अनुसार जानिए

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Vastu Shastra: वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार (Main Entrance) को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, मान्यता है कि इसी द्वार से घर में सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है, इसलिए यदि प्रवेश द्वार सही दिशा में हो, तो घर में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि मुख्य द्वार की सही दिशा कौन-सी मानी जाती है?Welcome to the Jungle Release Date: अक्षय कुमार की मल्टीस्टारर कॉमेडी इस दिन होगी रिलीज़

वास्तु के अनुसार सबसे शुभ दिशाएं
वास्तु शास्त्र के जानकारों के अनुसार घर के मुख्य द्वार के लिए कुछ दिशाएं अत्यंत शुभ मानी गई हैं.

पूर्व दिशा (East Facing Entrance)
पूर्व दिशा को सूर्य की दिशा कहा जाता है। इस दिशा में बना मुख्य द्वार सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है, स्वास्थ्य और मान सम्मान में वृद्धि करता है, ज्ञान और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है.

उत्तर दिशा (North Facing Entrance)
उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की दिशा मानी जाती है, इस दिशा में मुख्य द्वार होने से आर्थिक समृद्धि आती है, करियर और व्यापार में लाभ मिलता है, अवसरों की कमी नहीं होती.

ईशान कोण (North-East / उत्तर-पूर्व)
ईशान कोण को वास्तु में सबसे पवित्र दिशा माना गया है, आध्यात्मिक शांति मिलती है, घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है, परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बढ़ता है.

    कौन-सी दिशाएं मानी जाती हैं अशुभ?
    वास्तु के अनुसार कुछ दिशाओं में मुख्य द्वार होने से समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.
    दक्षिण-पश्चिम (South-West): तनाव, धन हानि और पारिवारिक कलह
    दक्षिण (South): स्वास्थ्य और करियर से जुड़ी परेशानियां, पश्चिम दिशा में द्वार तभी ठीक माना जाता है जब वास्तु नियमों का सही पालन हो.

    मुख्य द्वार से जुड़े अन्य वास्तु नियम
    प्रवेश द्वार हमेशा साफ, रोशन और बाधारहित होना चाहिए, दरवाजे के सामने कूड़ा, टूटे जूते या बंद दीवार नहीं होनी चाहिए, मुख्य द्वार घर के अन्य दरवाजों से बड़ा और मजबूत होना चाहिए, द्वार पर स्वस्तिक, शुभ लाभ या तोरण लगाना शुभ माना जाता है.

    वास्तु दोष होने पर क्या करें?
    यदि घर का मुख्य द्वार गलत दिशा में है, तो घबराने की जरूरत नहीं है, तांबे या पीतल की पट्टी वास्तु यंत्र शुभ रंगों का प्रयोग जैसे उपायों से वास्तु दोष को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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