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BasantPanchami2026: दिल्ली में सरस्वती पूजा के लिए ये 5 मंदिर सबसे पवित्र माने जाते हैं

Saraswati Puja in Delhi

Basant Panchami Delhi: आज पूरा देश बसंत पंचमी का त्योहार मना रहा है, बसंत पंचमी का पावन पर्व हर साल माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है. बसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है.

ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए राजधानी दिल्ली में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से पढ़ाई, करियर और जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है. आइए जानते हैं दिल्ली के उन 5 प्रमुख और पवित्र मंदिरों के बारे में, जहां सरस्वती पूजा के लिए खास भीड़ उमड़ती है.

दिल्ली में सरस्वती पूजा के लिए ये हैं 5 मंदिर

झंडेवाला देवी मंदिर, करोल बाग– दिल्ली के प्रसिद्ध मंदिरों में शुमार झंडेवाला देवी मंदिर में बसंत पंचमी के दिन विशेष पूजा होती है, यहां मां सरस्वती की आराधना के लिए विद्यार्थी और शिक्षक बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. पीले वस्त्र, पीले फूल और प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है.

छतरपुर मंदिर (कात्यायनी मंदिर परिसर)- छतरपुर स्थित यह विशाल मंदिर परिसर बसंत पंचमी पर भक्तों से भरा रहता है. यहां मां सरस्वती की विशेष प्रतिमा के समक्ष ज्ञान और विवेक की कामना की जाती है, परीक्षा और प्रतियोगी छात्रों के लिए यह स्थान खास माना जाता है.

कालकाजी मंदिर- कालकाजी मंदिर भले ही मां काली को समर्पित है, लेकिन बसंत पंचमी पर यहां मां सरस्वती की पूजा भी विशेष रूप से की जाती है, मान्यता है कि यहां पूजा करने से बुद्धि और आत्मविश्वास बढ़ता है.

बिड़ला मंदिर (लक्ष्मीनारायण मंदिर)– कनॉट प्लेस के पास स्थित बिड़ला मंदिर में बसंत पंचमी पर वैदिक मंत्रों के साथ सरस्वती वंदना की जाती है. शांत वातावरण और भव्य पूजा व्यवस्था के कारण यहां श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं.

योगमाया मंदिर, महरौली– दिल्ली के प्राचीनतम मंदिरों में शामिल योगमाया मंदिर में बसंत पंचमी का पर्व विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, यहां मां सरस्वती की पूजा को ज्ञान और साधना से जोड़ा जाता है.

    श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह
    बसंत पंचमी के दिन इन मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना, हवन और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, विद्यार्थी अपनी किताबें और कलम मां सरस्वती के चरणों में रखकर आशीर्वाद लेते हैं.

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