BasantPanchami: बसंत पंचमी का पर्व मां सरस्वती विद्या, बुद्धि और कला की देवी को समर्पित है. इस दिन देशभर में विद्यालयों, घरों और शिक्षण संस्थानों में कलम-किताब की पूजा की परंपरा निभाई जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर बसंत पंचमी पर ही कलम और किताब की पूजा क्यों की जाती है? इसके पीछे गहरा धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक महत्व छिपा है.
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मां सरस्वती और विद्या का संबंध
हिंदू धर्म में माँ सरस्वती को ज्ञान, वाणी, संगीत और लेखन की देवी माना गया है. शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इस दिन विद्या से जुड़े सभी साधनों—जैसे कलम, किताब, कॉपी और वाद्य यंत्रों—की पूजा कर उन्हें पवित्र माना जाता है.
कलम-किताब की पूजा का अर्थ
कलम और किताब केवल वस्तुएं नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्ति के साधन हैं, इनकी पूजा का अर्थ है विद्या के प्रति सम्मान और श्रद्धा, अहंकार त्याग कर ज्ञान को विनम्रता से अपनाना, पढ़ाई-लिखाई में एकाग्रता और सफलता की कामना.
बच्चों के लिए विशेष महत्व
बसंत पंचमी को कई स्थानों पर विद्यारंभ संस्कार भी कराया जाता है, जिसमें छोटे बच्चों को पहली बार लिखना सिखाया जाता है, माना जाता है कि इस दिन अक्षर ज्ञान शुरू करने से बच्चा तेज बुद्धि और अच्छे संस्कारों वाला बनता है.
पूजा की परंपरागत विधि
प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें, मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र के सामने कलम-किताब रखें, पीले फूल, हल्दी, केसर या मिठाई अर्पित करें, “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जप करें, इस दिन पढ़ाई शुरू करना या नया पाठ पढ़ना शुभ माना जाता है.
सांस्कृतिक और आधुनिक दृष्टिकोण
आज के समय में यह परंपरा बच्चों और युवाओं को यह संदेश देती है कि ज्ञान ही सबसे बड़ा धन है. कलम-किताब की पूजा शिक्षा के महत्व को रेखांकित करती है और विद्यार्थियों को मेहनत व अनुशासन की प्रेरणा देती है.
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