AstrologyTips: ज्योतिष में रत्न क्यों माने जाते हैं इतने शक्तिशाली? भारतीय ज्योतिष शास्त्र में रत्नों (Gemstones) को केवल आभूषण नहीं, बल्कि ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने वाला माध्यम माना गया है. यही कारण है कि कुंडली में ग्रह दोष, दशा या अशुभ प्रभाव होने पर ज्योतिषाचार्य रत्न धारण करने की सलाह देते हैं. लेकिन ज्योतिष में रत्न इतने शक्तिशाली क्यों माने जाते हैं?
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ग्रहों और रत्नों का गहरा संबंध
ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में मौजूद नौ ग्रह (नवग्रह) व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं, हर ग्रह से एक विशेष रत्न जुड़ा होता है.
सूर्य – माणिक
चंद्र – मोती
मंगल – मूंगा
बुध – पन्ना
गुरु – पीला पुखराज
शुक्र – हीरा
शनि – नीलम, मान्यता है कि जब कोई ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति में होता है, तो उससे संबंधित रत्न पहनने से उस ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा मजबूत होती है.
ऊर्जा और कंपन (Vibration) का सिद्धांत
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, हर रत्न में एक विशेष ऊर्जा तरंग और कंपन होता है, जब रत्न को सही धातु, सही उंगली और सही दिन में धारण किया जाता है, तो वह शरीर के माध्यम से ग्रहों की ऊर्जा को ग्रहण कर व्यक्ति के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है.
वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण
विज्ञान के अनुसार, रत्न प्राकृतिक खनिज होते हैं जिनकी संरचना में ऊर्जा को अवशोषित और संचारित करने की क्षमता होती है, वहीं मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि रत्न पहनने से व्यक्ति में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बढ़ती है, जो उसके निर्णय और कार्यक्षमता को बेहतर बनाती है.
गलत रत्न पहनने की चेतावनी
ज्योतिष शास्त्र में यह भी स्पष्ट कहा गया है कि गलत रत्न पहनना नुकसानदायक हो सकता है, बिना कुंडली जांच के रत्न पहनने से ग्रहों का असंतुलन बढ़ सकता है, जिससे मानसिक तनाव, आर्थिक हानि या स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.
रत्न धारण की सही विधि
रत्न तभी प्रभावी माने जाते हैं जब कुंडली के अनुसार सही रत्न चुना जाए, शुद्ध और प्रमाणित रत्न हो, उचित धातु और उंगली में पहना जाए, शुभ मुहूर्त और दिन का ध्यान रखा जाए.
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