AyurvedicRemediesForMigraine: माइग्रेन एक ऐसी समस्या है जो सिर के एक हिस्से में तेज दर्द, मतली, उल्टी और रोशनी-आवाज से परेशानी का कारण बनती है. बार-बार दवाइयों पर निर्भर रहना कई लोगों के लिए सही विकल्प नहीं होता, ऐसे में आयुर्वेद माइग्रेन के लिए प्राकृतिक और लंबे समय तक असर करने वाले उपाय सुझाता है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार सही दिनचर्या और जड़ी-बूटियों से माइग्रेन को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.
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एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
आयुर्वेदाचार्य डॉ. रवि शुक्ला के अनुसार, माइग्रेन मुख्य रूप से वात और पित्त दोष के असंतुलन से होता है. आयुर्वेद में जड़ से इलाज पर जोर दिया जाता है, जिससे दर्द की आवृत्ति और तीव्रता दोनों कम हो सकती हैं.
माइग्रेन के लिए 5 असरदार आयुर्वेदिक उपाय
1. शिरो अभ्यंग (तेल मालिश): तिल या ब्राह्मी तेल से सिर की हल्की मालिश करने से नसों को आराम मिलता है और तनाव कम होता है, यह माइग्रेन के दर्द को शांत करने में मदद करता है.
2. त्रिफला का सेवन: त्रिफला शरीर को डिटॉक्स करता है और पाचन सुधारता है, रात में गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने से माइग्रेन की समस्या में राहत मिल सकती है.
3. अनुलोम-विलोम और प्राणायाम: नियमित रूप से प्राणायाम करने से दिमाग को ऑक्सीजन मिलती है और तनाव कम होता है, इससे माइग्रेन के अटैक की संभावना घटती है.
4. आहार में बदलाव: आयुर्वेद के अनुसार बहुत तला-भुना, मसालेदार और जंक फूड माइग्रेन बढ़ा सकता है. हल्का, सात्विक और ताजा भोजन माइग्रेन पेशेंट्स के लिए बेहतर माना जाता है.
5. ब्राह्मी और शंखपुष्पी: ये आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां दिमाग को शांत करती हैं और स्मरण शक्ति बढ़ाती हैं, एक्सपर्ट्स के अनुसार इनका नियमित सेवन माइग्रेन में लाभकारी हो सकता है.
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