SaraswatiPujaDate: माघ मास में आने वाली बसंत पंचमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, इसी दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है. हर साल की तरह इस बार भी लोगों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि सरस्वती पूजा 22 जनवरी को होगी या 23 जनवरी को? पंचांग और तिथि गणना के अनुसार इसे लेकर भ्रम की स्थिति है, आइए जानते हैं सही तारीख और इसके पीछे का कारण.
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पंचमी तिथि से तय होती है सरस्वती पूजा
सरस्वती पूजा का आयोजन माघ शुक्ल पंचमी तिथि को किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय के समय रहती है, उसी दिन बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा मनाई जाती है. पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पंचमी तिथि का आरंभ 22 जनवरी की देर रात से हो रहा है और इसका समापन 23 जनवरी को दिन में होगा, ऐसे में पंचमी तिथि 23 जनवरी की सुबह भी मौजूद रहेगी.
किस दिन होगी सरस्वती पूजा?
धार्मिक नियमों और पंचांग गणना के आधार पर सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी, क्योंकि पंचमी तिथि इस दिन सूर्योदय के समय प्रभावी रहेगी, इसलिए पूजा, व्रत और सभी धार्मिक अनुष्ठान इसी दिन करना शास्त्रसम्मत माना गया है.
सरस्वती पूजा का शुभ महत्व
मां सरस्वती को विद्या, बुद्धि, कला और वाणी की देवी माना जाता है. इस दिन विद्यार्थी, शिक्षक और कलाकार विशेष रूप से पूजा करते हैं. बसंत पंचमी से ही बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है, इसलिए पीले वस्त्र पहनने और पीले फूल अर्पित करने की परंपरा भी है.
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