ShivPujaRules: हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और सही विधि से की गई शिव पूजा से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार, शिव पूजा में कुछ सामान्य गलतियां ऐसी हैं, जिनके कारण पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता. आइए जानते हैं उन प्रमुख बातों के बारे में, जिनका सोमवार को विशेष ध्यान रखना चाहिए.
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सोमवार को शिव पूजा में विशेष ध्यान रखना चाहिए
गलत विधि से जलाभिषेक करना: सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाना शुभ माना जाता है, लेकिन जलाभिषेक हमेशा धीमी और निरंतर धार से करना चाहिए. मान्यता है कि तेज धार से जल चढ़ाने या अधीरता में किया गया अभिषेक पूजा का फल कम कर देता है. साथ ही, शुद्ध जल और साफ पात्र का उपयोग आवश्यक है.
अशुद्ध वस्तुएं अर्पित करना: शिव पूजा में पवित्रता का विशेष महत्व है. टूटे हुए फूल, बासी बेलपत्र या खंडित सामग्री चढ़ाना अशुभ माना गया है. विशेष रूप से बेलपत्र को उल्टा (डंठल की ओर से) न चढ़ाएं और उस पर चढ़ा हुआ फूल दोबारा उपयोग न करें, ऐसी गलती से पूजा निष्फल मानी जाती है.
व्रत और आचरण में लापरवाही: सोमवार व्रत रखने वाले भक्तों को दिनभर संयम का पालन करना चाहिए. व्रत के दौरान क्रोध, अपशब्द, असत्य और नकारात्मक व्यवहार से बचना जरूरी है. धार्मिक मान्यता है कि गलत आचरण से पूजा का प्रभाव कम हो जाता है, चाहे विधि कितनी ही सही क्यों न हो.
मंत्र जाप में त्रुटि: शिव पूजा में मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है, अधूरे या गलत उच्चारण वाले मंत्रों का जाप करने से पूर्ण फल नहीं मिलता. विशेष रूप से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ जप करना चाहिए. मन का भटकाव भी एक बड़ी भूल मानी जाती है.
पूजा के बाद ये काम न करें: पूजा के बाद तुरंत नकारात्मक बातें करना, झूठ बोलना या तामसिक भोजन ग्रहण करना भी पूजा के प्रभाव को कम कर सकता है. मान्यता है कि पूजा के बाद कुछ समय तक शांत और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना चाहिए.
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