MaunVrat: मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है, मान्यता है कि इस दिन वाणी पर संयम रखने से मन की शुद्धि होती है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है, लेकिन कई बार अनजाने में या मजबूरीवश मौन व्रत टूट जाता है, जिससे श्रद्धालु चिंतित हो जाते हैं, ऐसे में शास्त्र क्या उपाय बताते हैं, आइए जानते हैं.
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क्या मौन व्रत टूटने से व्रत निष्फल हो जाता है?
शास्त्रों के अनुसार, अनजाने में मौन टूट जाना पाप नहीं माना जाता, धर्मग्रंथों में स्पष्ट कहा गया है कि व्रत की पूर्णता भावना और निष्ठा पर निर्भर करती है, न कि केवल नियमों पर, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है.
मौन व्रत टूट जाए तो तुरंत क्या करें?
मन में पश्चाताप कर क्षमा याचना करें- जैसे ही मौन टूटे, मन ही मन भगवान से क्षमा मांगें और संकल्प लें कि आगे वाणी पर संयम रखेंगे. शास्त्रों में इसे प्रायश्चित का पहला और सबसे सरल उपाय बताया गया है.
कुछ समय के लिए पूर्ण मौन धारण करें- यदि वाणी निकल गई हो, तो उसके बाद कम से कम कुछ घंटों तक पुनः मौन व्रत रखें, यह व्रत की शुद्धि के लिए पर्याप्त माना जाता है.
मंत्र जप करें- मौन के साथ किया गया मंत्र जप अत्यंत फलदायी होता है. “ॐ नमः शिवाय”, गायत्री मंत्र या अपने इष्ट देव का नाम जपना शुभ माना गया है.
अन्न या जल दान करें- गरुड़ पुराण के अनुसार, मौनी अमावस्या पर किया गया छोटा सा अन्न दान या जल दान भी बड़ी त्रुटि का निवारण कर देता है, जरूरतमंद को भोजन या पानी देना उत्तम उपाय है.
पितरों का स्मरण करें- मौनी अमावस्या पितृ तर्पण का भी दिन है, मौन टूटने पर पितरों का ध्यान कर जल अर्पित करने से मानसिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है.
शास्त्र क्या कहते हैं?
धर्मग्रंथों में कहा गया है कि व्रत में हुई अनजानी भूल को सच्चे मन से किए गए प्रायश्चित और संयम से दूर किया जा सकता है. भय या तनाव की बजाय श्रद्धा और शांति के साथ दिन का पालन करना ही सबसे बड़ा उपाय है.
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