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MakarSankranti: पर पतंग उड़ाने से मिलती है खुशहाली और समृद्धि

Makar Sankranti Flying kites

Flying kites on Makar Sankranti: मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में सकारात्मक ऊर्जा, नई शुरुआत और खुशहाली का प्रतीक है. हर साल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही यह पर्व पूरे देश में उल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है, खास बात यह है कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसे सुख-समृद्धि और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है.

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सूर्य देव का स्वागत और शुभता का संदेश
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का दिन कहा जाता है. इस अवसर पर आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें सूर्य देव का स्वागत करती हैं, मान्यता है कि इस दिन पतंग उड़ाने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और धन, यश व सफलता का मार्ग खुलता है.

नकारात्मकता से मुक्ति, सकारात्मक ऊर्जा का संचार
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति पर किया गया हर शुभ कार्य कई गुना फल देता है. पतंग उड़ाने से व्यक्ति खुली हवा और सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आता है, जिससे मन और शरीर दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. कहा जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक तनाव में कमी आती है.

स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद
वैज्ञानिक दृष्टि से भी मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाना लाभकारी माना गया है। सर्दियों में सूर्य की किरणें शरीर के लिए बेहद उपयोगी होती हैं. पतंग उड़ाने के दौरान हाथ-पैर सक्रिय रहते हैं, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है और विटामिन-डी की पूर्ति होती है। यही कारण है कि इसे स्वास्थ्य से भी जोड़ा जाता है.

भाईचारे और एकता का पर्व
मकर संक्रांति पर छतों पर जमा होती भीड़, बच्चों की हंसी, ढोल-नगाड़ों की आवाज और तिल-गुड़ की मिठास इस पर्व को खास बनाती है. पतंगबाजी केवल खेल नहीं, बल्कि आपसी मेल-मिलाप, प्रेम और भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम भी है.

जीवन में ऊँचाइयों को छूने की प्रेरणा
पतंग उड़ाने की परंपरा जीवन को एक गहरा संदेश देती है, जैसे पतंग हवा के सहारे ऊँचाई तक पहुँचती है, वैसे ही इंसान को भी संघर्ष के साथ आगे बढ़कर सफलता की ऊँचाइयों को छूना चाहिए.

परंपरा जो आज भी उतनी ही जीवंत
कुल मिलाकर मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाना सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि खुशहाली, समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच से जुड़ी एक जीवंत परंपरा है, यही वजह है कि बदलते समय के बावजूद यह त्योहार आज भी लोगों के दिलों में उतनी ही उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता है.

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