Makar Sankranti kite flying: हर साल जनवरी महीने में मनाई जाने वाली मकर संक्रांति सिर्फ सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह खुशियों, उत्सव और नई ऊर्जा का भी प्रतीक है, इस दिन लोग आकाश में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे क्या धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण है?
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सूर्य देव और पतंग का संबंध
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव उत्तरायण मार्ग पर प्रवेश करते हैं, जो नए साल की शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत है. पतंग उड़ाना इस ऊर्जा और उत्सव का प्रतीक माना जाता है, लोग मानते हैं कि पतंग उड़ाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और पुराने साल की नकारात्मकताएं दूर होती हैं.
सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व
पतंग उड़ाने की परंपरा पंजाब, गुजरात और राजस्थान में खासतौर पर मनाई जाती है. यह पर्व सामाजिक मेल-जोल और उत्सव का प्रतीक भी है, परिवार और दोस्त मिलकर पतंग उड़ाते हैं और खुशियाँ बांटते हैं. पतंग उड़ाने के दौरान मिठाई बाँटना और लोगों को आमंत्रित करना पारंपरिक संस्कृति का हिस्सा है.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक दृष्टि से, पतंग उड़ाने का मौसम ठंडी हवाओं और साफ आकाश के कारण आदर्श होता है, यह न केवल मनोरंजन प्रदान करता है, बल्कि लोगों को बाहर निकलकर सूर्य की किरणों के संपर्क में लाता है, जिससे स्वास्थ्य लाभ भी होता है.
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