Mental bonding in relationship: आज के दौर में रिश्तों को अक्सर केवल शारीरिक निकटता या सोशल स्टेटस से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किसी भी रिश्ते की असली नींव मेंटल बॉन्डिंग यानी मानसिक जुड़ाव पर टिकी होती है, इसके बिना रिश्ता लंबे समय तक टिक नहीं पाता.
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एक्सपर्ट की राय
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ. शिवानी मिश्रा (Relationship & Mental Health Expert) के अनुसार, मेंटल बॉन्डिंग का मतलब है एक-दूसरे की सोच, भावनाओं और डर को समझना, यही किसी रिश्ते की असली नींव होती है.
क्या होती है मेंटल बॉन्डिंग?
मेंटल बॉन्डिंग का अर्थ है एक-दूसरे की सोच, भावनाओं और विचारों को समझना और स्वीकार करना. इसमें संवाद, भरोसा और भावनात्मक समर्थन अहम भूमिका निभाते हैं.
क्यों अधूरा रह जाता है रिश्ता?
1. संवाद की कमी- जब दो लोग मानसिक रूप से जुड़े नहीं होते, तो खुलकर बात करने में झिझक होती है, इससे गलतफहमियाँ बढ़ती हैं और दूरी पैदा होती है.
2. भावनात्मक असुरक्षा- मेंटल बॉन्डिंग न होने पर व्यक्ति खुद को अकेला महसूस करता है, भले ही रिश्ता बाहर से मजबूत क्यों न दिखे.
3. भरोसे की नींव कमजोर होती है- विश्वास तभी बनता है जब एक-दूसरे की सोच और भावनाओं को समझा जाए. मानसिक जुड़ाव के बिना भरोसा टिकाऊ नहीं रहता.
4. मुश्किल वक्त में साथ नहीं मिलता- शारीरिक निकटता सुख के पल देती है, लेकिन मेंटल बॉन्डिंग ही मुश्किल समय में सहारा बनती है.
5. रिश्ते में स्थिरता नहीं रहती- बिना मानसिक जुड़ाव के रिश्ता अक्सर उतार-चढ़ाव से भरा रहता है और छोटी बातों पर टूटने की कगार पर पहुँच जाता है.
मेंटल बॉन्डिंग कैसे मजबूत करें?
एक-दूसरे की बात ध्यान से सुनें, भावनाओं का सम्मान करें, नियमित संवाद बनाए रखें, भरोसे और ईमानदारी को प्राथमिकता दें.
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